27 जुलाई 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

Chhattisgarhi Film Songs: धनेश के आराधना, टीना टप्पर समेत 250 से ज्यादा गीत लिख चुके विष्णुराम कोठारी, बोले- फूहड़ गाने संस्कृति के लिए घातक, जानें उनका सफर

Vishnuram Kothari Journey: बालोद के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम फिरतुटोला निवासी गीतकार, लेखक, संगीतकार और गायक विष्णुराम कोठारी ने अपनी प्रतिभा के दम पर छत्तीसगढ़ी लोककला और सिनेमा में अलग पहचान बनाई है।
2 min read
Google source verification
250 Songs Vishnuram Kothari

छत्तीसगढ़ और देश में अलग पहचान बनाई (फोटो सोर्स- पत्रिका)

Chhattisgarhi Film Songs: बालोद जिल के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम फिरतुटोला के गीतकार, लेखक, संगीतकार और गायक 54 वर्षीय विष्णुराम कोठारी छत्तीसगढ़ी लोककला का बड़ा नाम हैं। उन्होंने मेहनत और साधना से न केवल बालोद जिले बल्कि छत्तीसगढ़ और देश में अलग पहचान बनाई है। उन्होंने अब तक 15 छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं। इसके अलावा उनके 250 से अधिक गीत विभिन्न मंचों, एल्बमों और आकाशवाणी-दूरदर्शन पर प्रसारित हो चुके हैं। उनके गीत आज भी प्रदेशभर में लोगों की जुबान पर हैं।

रामायण से शुरू हुई थी उनकी यात्रा

उन्होंने बताया कि कला की शुरुआत रामायण और रामलीला से की। वर्ष 1986 में कक्षा आठवीं में पढ़ते समय उन्होंने पहला गीत लिखा। उनका पहला गीत 1997 में दूरदर्शन और आकाशवाणी से प्रसारित हुआ। 2000 में संगीत में डिप्लोमा करने के बाद उन्होंने लगातार लेखन किया। उनके कई गीत संस्कृति विभाग के माध्यम से दिल्ली तक पहुंचे और सराहे गए।

सुपरहिट गीतों के पीछे यही नाम

उन्होंने बेनाम बादशाह, बीए सेकंड ईयर, मीत, धनेश के आराधना, टीना टप्पर, मन के मीत सहित दर्जनों चर्चित छत्तीसगढ़ी फिल्मों के लिए गीत लिखे हैं। गीत छोटे से टिकली लगाए, गोरी दो बेनी गथाए, उमड़ घुमड़ बाजे मोर, मोर मन के मीत (Chhattisgarhi Film Songs) और फिल्म टीना टप्पर का सुपरहिट गीत कर ले मया के चिन्हारी आज भी लोकप्रिय हैं।

शासन और साहित्यिक संगठनों ने किया सम्मानित

लोक कला और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए छत्तीसगढ़ शासन के संस्कृति विभाग ने उन्हें सम्मानित किया है। इसके अलावा राज्य के विभिन्न कला और साहित्यिक संगठनों ने भी उन्हें सम्मान देकर प्रोत्साहित किया है।

फूहड़ गीतों परिवार के साथ नहीं सुन सकते

उन्होंने फूहड़ गीतों पर चिंता जताते हुए कहा कि कुछ गायक जल्दी प्रसिद्ध होने के लिए अश्लील और फूहड़ गीत गा रहे हैं। ऐसे गीत परिवार के साथ नहीं सुने जा सकते। यह हमारी छत्तीसगढ़ी संस्कृति और युवा पीढ़ी के लिए घातक है। सरकार को इस पर रोक लगानी चाहिए। लोक कला को मर्यादा और संस्कार के साथ आगे बढ़ाना जरूरी है, तभी वह समाज को सही दिशा दे सकेगी।