
Chhattisgarh News: 20 साल पहले किसी कारण से बेमेतरा जिले के जेवरा निवासी 70 वर्षीय चंद्रप्रभा मानिकपुरी घर छोडक़र चली गई थी। इसके बाद परिजनों ने काफी खोजबीन की, लेकिन वे नहीं मिली। चंद्रप्रभा मानिकपुरी के बेटे लखन दास मानिकपुरी ने बताया कि 4 से 5 साल तक लगातार अपनी मां की परिवार सहित खोजबीन की, लेकिन उनका पता नहीं चला।
लगभग 20 साल बाद सुरेश निर्मलकर का मोबाइल से कॉल आया और बताया कि आपकी मां बालोद में है। इस बात को सुनकर पहले तो उनके बेटे को यकीन नहीं हुआ, जब सूचना पर बालोद आए, तब देखा कि उनकी मां जीवित है। क्योंकि परिजन पहले उन्हें मृत मान चुके थे। अपनी मां को देखकर लखनदास भावुक हो गए। आंख से आंसू छलक पड़े और सही सलामत अपने घर ले गए।
शहर के सुरेश निर्मलकर, एल्डरमैन हितेश्वरी कौशिक और शिव कृपा महिला मानस मंडली के अथक प्रयासों से यह भावुक पुनर्मिलन संभव हुआ। एल्डरमैन हितेश्वरी कौशिक, सुरेश निर्मलकर ने बताया मामला तब प्रकाश में आया, जब अस्वस्थ होने पर चंद्रप्रभा को जिला अस्पताल बालोद में भर्ती किया गया था। वे दो दिन बेहोश रहीं और उन्हें ऑक्सीजन पर रखा गया। एक सप्ताह के इलाज के बाद स्वास्थ्य में सुधार हुआ तो उनके परिजनों की खोज शुरू की गई, क्योंकि उनके पास कोई संपर्क नंबर नहीं था। इन दस वर्षों में चंद्रप्रभा ने कभी अपने परिवार का जिक्र नहीं किया था।
सुरेश निर्मलकर ने तत्परता दिखाते हुए गहन खोजबीन की। उन्हें पता चला कि चंद्रप्रभा का बेटा लखनदास मानिकपुरी ग्राम जेवरा और बेटी सोनी मानिकपुरी (पति मनहरण) ग्राम खैरझिटी, बेमेतरा में निवास करते हैं। कई स्तरों पर संपर्क कर परिवार को उनकी मां के जीवित होने की जानकारी दी। सूचना मिलते ही बेटा-बेटी बालोद पहुंचे। पूरा परिवार मां को दोबारा पाकर भाव-विभोर हो गया और उन्हें अपने साथ घर ले गया।
इसमें एल्डरमैन हितेश्वरी कौशिक का मार्गदर्शन और शिव कृपा महिला मानस मंडली की अध्यक्ष कल्याणी कौशिक, अनीता देशमुख, रेखा यादव, गुनीता साहू, सुशीला यादव, निर्मला यादव, यशोदा यादव, गंगा शर्मा का योगदान रहा। मंडली ने दस वर्षों से चंद्रप्रभा की नि:स्वार्थ सेवा की थी। इस मानवीय कार्य की नगर और क्षेत्र में सराहना हो रही है। महिला चंद्रप्रभा के बेटे लखनदास ने शिव कृपा मानस मंडली का आभार माना। उन्होंने कहा कि आज मुझे 52 साल हो गए हैं, लगभग 20 साल पहले अंतिम बार अपनी मां को देखा था।