
मैं जिंदा हूं साहब, टोकन तो कटवा दो (फोटो सोर्स- पत्रिका)
CG News: मैं जिंदा हूं साहब, बस धान बेचने के लिए मेरा टोकन कटवा दीजिए। यह शब्द उस किसान के हैं, जिसे सरकारी रिकॉर्ड में मृत घोषित कर दिया गया है। शुक्रवार को बलौदाबाजार कलेक्ट्रेट में एक अनोखा और गंभीर मामला सामने आया। भाटापारा ब्लॉक के करही बाजार निवासी किसान पंचराम यदु अपने जिंदा होने के प्रमाण पत्र लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचा। कारण यह कि आधार कार्ड में उन्हें मृत दर्शाए जाने के चलते उनका धान विक्रय टोकन अब तक नहीं कट सका।
किसान पंचराम यदु का कहना है कि आधार कार्ड निष्क्रिय होने के कारण उनका एग्रीस्टेक पोर्टल में पंजीयन नहीं हो पाया। पंजीयन नहीं होने से समिति में टोकन भी नहीं कटा और वे अपनी मेहनत की फसल नहीं बेच पा रहे हैं। जब लगातार तहसील कार्यालय के चक्कर लगाने के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे जिला मुख्यालय पहुंचे।
पंचराम यदु ने बताया कि वे हर साल लगभग 130 क्विंटल धान करही बाजार समिति में बेचते हैं। इस बार टोकन कटवाने पहुंचे तो समिति में बताया गया कि उनका आधार निरस्त है, क्योंकि रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु दर्ज है। किसान अब अधिकारियों को यह साबित करने में जुटा है कि वह जिंदा है, ताकि उसका धान बिक सके।
जिला खाद्य अधिकारी पुनीत वर्मा ने कहा कि आधार कार्ड एक्टिव नहीं होने से इस तरह की समस्या आ सकती है। पूरे मामले की जानकारी ली जा रही है और जांच के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
जैसा कि पूर्व में ‘पत्रिका’ ने आशंका जताई थी, धान खरीदी के अंतिम चरण में किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिले में कई किसान टोकन न कटने के कारण अपने खेतों और ब्यारे में धान की रखवाली करने को मजबूर हैं। कहीं चौकीदार रखे गए हैं, तो कहीं किसान खुद रातें गुजार रहे हैं। समितियों के चक्कर और कर्मचारियों से बहस अब किसानों की दिनचर्या बनती जा रही है।
पंचराम यदु ने बताया कि वर्ष 2014 में करही बाजार समिति परिसर से उनका 40 क्विंटल धान चोरी हो गया था। इस मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई, लेकिन आज तक धान नहीं मिल सका।
ग्राम गोढ़ी (टी) निवासी सेवानिवृत्त प्राचार्य रघुनाथ वर्मा (76) भी टोकन संकट से जूझ रहे हैं। उनके पास 12.5 एकड़ भूमि है, जिसमें लगभग 261 क्विंटल धान का उत्पादन हुआ है। शासन द्वारा समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू होने के बाद उन्होंने लगातार टोकन के लिए प्रयास किए, लेकिन (बड़े किसान) होने का हवाला देकर प्रारंभिक दिनों में टोकन नहीं काटा गया। 12 दिसंबर 2025 को पहला टोकन कटा, जिसमें 13 जनवरी 2026 की तारीख मिली। उस दिन 140 क्विंटल धान बिका, लेकिन 121 क्विंटल धान अब भी शेष है।
वर्मा ने बताया कि ऑनलाइन टोकन भर जाने के कारण अब तक शेष धान नहीं बिक सका। बीते ढाई माह से धान ब्यारे में रखा है। चौकीदार न आने पर वे खुद ब्यारे में सोकर धान की रखवाली कर रहे हैं। चूहों और अन्य जानवरों से नुकसान हो रहा है। यदि पूरा धान नहीं बिका, तो उन्हें भारी आर्थिक घाटा उठाना पड़ेगा।
Updated on:
17 Jan 2026 02:57 pm
Published on:
17 Jan 2026 02:56 pm
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