
बालोद जिले में शिक्षा व्यवस्था बेहाल है। मानसून सीजन में टपकती छत, कला मंच में बैठकर विद्यार्थी पढ़ाई करने मजबूर हो गए हैं। शासन-प्रशासन ने स्कूल भवन बनाकर जल्द देने की बात कही पर हकीकत कुछ और है। कहीं नाला पार कर स्कूल जा रहे हैं तो कहीं राहत की आस में 10 साल बीत गए क्योंकि यहां आठ साल से नाले पर पुलिया बनाने की मांग की जा चुकी है पर वन विभाग पुलिया नहीं बना रहा है।
हम बात कर रहे हैं जिले के डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम राहटा की, जहां एक साल पहले गांव के जर्जर स्कूल भवन को तोड़ा गया पर तोडऩे के बाद अब तक स्कूल भवन बनाने कोई सुध ही नहीं ली गई। कक्षा पहली से पांचवी तक यहां लगभग 11 छात्र गांव के कला मंच में बैठकर पढ़ाई करते हैं।
यहां स्थिति यह है कि अगर तेज हवा के साथ बारिश हुई तो यहां कॉपी-किताब भीग जाते हैं क्योंकि कला मंच चारों तरफ से खुला हुआ है। ग्रामीणों ने कई बार जल्द से जल्द स्कूल भवन निर्माण के लिए आवेदन दिया लेकिन यहां तो विकासखंड शिक्षा अधिकारी स्कूल की स्थिति देखने तक नहीं आए। ग्रामीणों के साथ छात्रों ने कहा कि उन्हें उनका स्कूल भवन बनाकर दे दीजिए ताकि वे अच्छे से पढ़ाई कर सकें।
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यहां मध्याह्न भोजन भी बच्चों को किचन में बैठाकर खिलाते हैं। दरअसल यहां बाहर बैठाकर भोजन कराएं तो बारिश में परेशानी होती है। इसलिए यहां किचन कक्ष में ही सभी बच्चों को बैठाकर भोजन कराया जाता है।
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छात्रा काजल ने बताया कि गांव में प्राथमिक तक पढ़ाई कर पाते हैं लेकिन माध्यमिक व हाईस्कूल की पढ़ाई के लिए भंवरमरा या रायगढ़ जाते हैं पर यहां तक का सफर आसान नहीं बल्कि कठिनाइयों से भरा हुआ है। तीन किलोमीटर घने जंगल और जंगल के बीच नाला उच्च शिक्षा में बाधा बन रही है।
ग्रामीण हेमराज सहित अन्य ग्रामीणों ने कहा कि नाले में पुल निर्माण के लिए वन विभाग को 50 से अधिक बार आवेदन व कलेक्टर को भी दे चुके हैं पर भी कोई सुनवाई नहीं हुई। वन विभाग और जिला प्रशासन तो यहां पुलिया बनाना ही नहीं चाह रहे हैं।
यहां आने के बाद पता चला कि यहां जन प्रतिनिधि, नेता सिर्फ चुनाव के समय ही आते हैं वोट मांगने। गांव में पहुंच मार्ग खराब है, घने जंगल हैं इसलिए यहां न अधिकारी न नेता न ही जनप्रतिनिधि आते हैं। यही वजह है कि यह गांव उपेक्षित है।
जिले के 17 स्कूल भवन विहीन हैं।
स्कूली बच्चे कला मंच, सामुदायिक भवन में बैठकर पढ़ाई करते हैं।
जिले के 64 स्कूल जर्जर है, जहां बच्चे बैठकर पढ़ाई नहीं करते।
वहीं 18 ऐसे अति जर्जर स्कूल भवन हैं, जो तोडऩे योग्य हैं।
बालोद जिला शिक्षा अधिकारी दीपक दुबे ने कहा कि राहटा गांव में कलामंच में स्कूल भवन संचालन की जानकारी मिली है। यहां स्कूल भवन जर्जर होने के कारण तोड़ा गया है। नए स्कूल भवनों के लिए शासन को प्रस्ताव बनाकर भेजा गया है। शासन से स्वीकृति के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी। जर्जर व भवन विहीन स्कूलों के बच्चों को वैकल्पिक भवनों में बैठकर पढ़ाई कराई जा रही है।
बालोद डीएफओ अभिषेक अग्रवाल ने कहा कि राहटा गांव का नाला अगर वन विभाग की जमीन पर है तो वहां पुलिया का निर्माण कराया जा सकता है। इसके बारे में जानकारी लेकर आगे की कार्यवाही की जाएगी। संबंधित रेंजर से जानकारी ली जाएगी।
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Updated on:
05 Jul 2026 12:00 am
Published on:
05 Jul 2026 12:00 am
