
बालोद. जिले के गुरुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम दुबचेरा निवासी तेजराम साहू (40) का सोमवार को निधन हो गया। तेजराम विगत 15 दिनों से बीमार चल रहा था, पर परिवारजन तेजराम की मौत को जनपद पंचायत गुरुर के आलाधिकारियों की मानसिक प्रताडऩा को कारण बता रहे हैं, वहीं अधिकारी का कहना है वह काम के प्रति लापरवाह था, इसलिए वेतन जारी नहीं किया गया था।
मृतक तेजराम साहू डौंडीलोहारा के कुआगांव पंचायत में सचिव के पद पर विगत 3 माह से पदस्थ थे। उससे पहले गुरुर विकासखंड के पंचायत बोडऱा में 4 साल से सचिव के पद पर पदस्थ रहे हैं। मिली जानकारी अनुसार तेजराम को ग्राम पंचायत बोडऱा में पदस्थ रहते हुए 9 माह का वेतन नहीं मिल पाया था, जिसके बाद किसी शिकायत के आधार पर उन्हें डौंडीलोहारा जनपद क्षेत्र के कुआंगांव पंचायत में ट्रासंफर कर दिया गया। जहां भी उन्हें 3 माह का वेतन नहीं मिला।
गुरुर जनपद पंचायत से एलपीसी यानी अग्रिम भुगतान पत्रक डौंडीलोहारा जनपद को भी भेजा गया था। जब इस मामले में गुरुर जनपद पंचायत की सीईओ रौशनी भगत से बात की गई, तो उन्होंने बताया सचिव तेजराम साहू की लगातार शिकायतें प्राप्त हो रही थी। जनपद की बैठक के दौरान भी कई बार वह अनुपस्थित रहता था। साथ ही हमेशा नशे में रहता था।
काम में लापरवाही के कारण उनका वेतन रोका गया है। शिकायतों के आधार पर ही उनका ट्रासंफर गुरुर से डौंडीलोहारा जनपद किया गया था। उन्हें कार्यों में सुधार लाने कई बार नोटिस भी दिया गया है। कोई काम ही नहीं करेगा, तो
उसे किस बात का वेतन, नो वर्क नो पेमेंट। मृतक तेजराम के परिजन ने विभाग पर आरोप लगाया है कि 12 महीने से वेतन नहीं दिए जाने के कारण तेजराम सहित पूरा परिवार आर्थिक तंगी से जूझ रहा था, जिसके कारण कई तरह की मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
मृतक तेजराम के पिता ने यह भी आरोप लगाया है कि गुरुर जनपद पंचायत में स्थापना शाखा में पदस्थ महेश पटेल ने वेतन निकालने के लिए राशि की मांग की थी। मृतक तेजराम साहू के परिवार ने सीईओ एवं स्थापना शाखा के अधिकारी पर मानसिक प्रताडऩा का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा अगर शिकायतें थी, काम में लापरवाही थी तो ट्रांसफर क्यों किया गया, सीधे बर्खास्त ही कर देते। विगत 4 साल से बोडऱा पंचायत में जिम्मेदारी पूर्वक अपने दायित्वों का निर्वाहन करता रहा है।
तेजराम की मौत के बाद कई सारे सवाल आ खड़े हुए हैं। अगर वाकई में उसकी लगातार शिकायतें मिल रही थी, कामों में लापरवाही थी और नशे का आदी था, तो उस पर कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की गई। उसका सिर्फ ट्रांसफर क्यों किया गया? ग्राम पंचायत बोडऱा में रहते हुए 9 माह और पंचायत कुआंगांव में रहते हुए 3 माह का वेतन क्यों रोका गया? जनपद पंचायत गुरुर की सीईओ और स्थापना शाखा के अधिकारी को सवालों के कटघरे में ला खड़ा कर दिया हैं।