22 जुलाई 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

epaper_icon

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

15-20 साल नौकरी की, फिर भी नहीं मिली नियमित नियुक्ति, बालोद में 11 साल से अटकी भर्ती

Balod Health Department: बालोद स्वास्थ्य विभाग में वाहन चालक के 14 पदों की भर्ती 2014 में गड़बड़ी के कारण रद्द कर दी गई थी। 11 साल बाद भी नई भर्ती शुरू नहीं हो सकी।
3 min read
Google source verification
Driver Recruitment Balod

स्वास्थ्य विभाग वाहन चालक की भर्ती (photo source- Patrika)

Driver Recruitment Balod: सरकारी नौकरी की उम्मीद में कई अभ्यर्थियों की उम्र गुजर गई, लेकिन स्वास्थ्य विभाग आज भी नए वाहन चालकों की भर्ती पूरी नहीं कर सका। वर्ष 2014 में 14 वाहन चालक पदों पर भर्ती प्रक्रिया में अनियमितता और पैसे के लेन-देन की शिकायतों की पुष्टि होने के बाद पूरी भर्ती रद्द कर दी गई थी। इसके बाद 11 साल बीत जाने के बावजूद दोबारा भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी।

इसका सीधा असर जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, जहां एंबुलेंस और रेफर वाहनों का संचालन सीमित वाहन चालकों के भरोसे किया जा रहा है। भर्ती रद्द होने के बाद स्वास्थ्य विभाग और शासन स्तर पर नई प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हुई। नतीजतन, रिक्त पद आज भी खाली हैं और विभाग को अस्थायी व्यवस्था के सहारे काम चलाना पड़ रहा है।

Balod Health Department: सिर्फ एक नियमित चालक, बाकी कलेक्टर दर पर

जिले में वर्तमान समय में स्वास्थ्य विभाग के एंबुलेंस और रेफर वाहनों के संचालन के लिए केवल नौ वाहन चालक कार्यरत हैं। इनमें से सिर्फ एक चालक नियमित कर्मचारी है, जबकि बाकी सभी कलेक्टर दर पर नियुक्त हैं। चालकों की कमी का असर रोजमर्रा की स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। कई बार एक ही चालक को अलग-अलग वाहनों की जिम्मेदारी निभानी पड़ती है, जिससे कार्यभार बढ़ने के साथ आपातकालीन सेवाओं के प्रभावित होने का खतरा भी बना रहता है।

15 से 20 साल की सेवा, फिर भी नहीं मिला स्थायी रोजगार

स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से संविदा और कलेक्टर दर पर काम कर रहे कई वाहन चालक 15 से 20 साल से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्हें उम्मीद थी कि नई भर्ती होने पर अनुभव के आधार पर नियमित नियुक्ति का अवसर मिलेगा, लेकिन 11 साल की देरी ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। कई चालक अब आयु सीमा पार करने की स्थिति में पहुंच चुके हैं। ऐसे में नियमित सरकारी नौकरी का सपना लगभग टूटता नजर आ रहा है। लंबे समय तक सेवा देने के बावजूद उनका भविष्य अब भी अस्थायी रोजगार पर टिका हुआ है।

भर्ती नहीं होने से बढ़ा काम का दबाव

वाहन चालकों की कमी का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। एंबुलेंस और रेफर वाहनों के संचालन में भी अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। किसी चालक के अवकाश पर जाने या आकस्मिक स्थिति में वाहन संचालन प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं में पर्याप्त वाहन चालकों की उपलब्धता बेहद जरूरी है। यदि रिक्त पद लंबे समय तक खाली रहते हैं तो मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में परेशानी आ सकती है।

सरकार बदलने पर जगी थी उम्मीद

प्रदेश में सरकार बदलने के बाद वाहन चालकों और भर्ती का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों को उम्मीद थी कि वर्षों से लंबित भर्ती प्रक्रिया को फिर से शुरू किया जाएगा। हालांकि अब तक इस दिशा में कोई ठोस निर्णय सामने नहीं आया है। इस कारण भर्ती की प्रतीक्षा कर रहे युवाओं के साथ-साथ वर्षों से कार्यरत अस्थायी चालक भी असमंजस की स्थिति में हैं।

Chhattisgarh Govt Recruitment: शासन को भेजा गया प्रस्ताव

मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जे.एल. उइके ने बताया कि वाहन चालक भर्ती प्रक्रिया शुरू करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। शासन से अनुमति मिलते ही निर्देशानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

एक नजर में स्थिति

वर्ष 2014 में 14 वाहन चालक पदों की भर्ती प्रक्रिया रद्द हुई।
भर्ती में गड़बड़ी और पैसों के लेन-देन की शिकायतें सही पाई गई थीं।
11 साल बाद भी नई भर्ती शुरू नहीं हो सकी।
जिले में केवल 9 चालक कार्यरत हैं।
इनमें सिर्फ 1 नियमित कर्मचारी, बाकी कलेक्टर दर पर नियुक्त हैं।
कई चालक 15-20 वर्षों से सेवा दे रहे हैं, लेकिन नियमितीकरण नहीं हुआ।
भर्ती प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है, अनुमति का इंतजार है।

सरकारी भर्ती में हुई एक अनियमितता का असर केवल अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और आपातकालीन सेवाओं पर भी दिखाई दे रहा है। अब निगाहें शासन के उस फैसले पर टिकी हैं, जिससे 11 साल से अटकी यह भर्ती प्रक्रिया आखिरकार आगे बढ़ सके।