बालोद

नर्सिंग-डे स्पेशल: जच्चा-बच्चा केंद्र में डॉक्टर नहीं नर्से संभाल रही मोर्चा

जिले का पहला जच्चा-बच्चा केंद्र चिकित्साविहीन है। लगभग 2३ दिनों से आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित अस्पताल में बंद की स्थिति है।

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May 11, 2018
Balod news

बालोद. जिले का पहला जच्चा-बच्चा केंद्र वर्तमान में चिकित्साविहीन है। लगभग 2३ दिनों से जिले के सबसे बड़े व आधुनिक संसाधनों से सुसज्जित अस्पताल में बंद की स्थिति है। स्टॉफ नर्सों के भरोसे अस्पताल से बच्चों को केवल रेफर किया जा रहा है। स्थिति ऐसी हो गई है कि अस्पताल में बीमार नवजात बच्चों को भर्ती नहीं ले रहे हैं। इसकी जानकारी जिले के उच्च अधिकारियों को नहीं है और न ही जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की जानकारी लेने की जरूरत महसूस की जा रही है। जच्चा-बच्चा केंद्र में बच्चों का इलाज नहीं होने के कारण पालक बच्चों को निजी अस्पतालों में ले जाने को मजबूर हैं।

12 करोड़ की लागत से बने जच्चा-बच्चा केंद्र

बता दें कि जिला अस्पताल के पास 12 करोड़ की लागत से बने जच्चा-बच्चा केंद्र को संभालने वाले चिकित्सक सड़क दुर्घटना में घायल हो गए हैं, जिसके कारण इलाज के लिए उसने एक माह की छुट्टी ले ली है। ऐसे में केंद्र में नवजात बच्चों के इलाज के लिए कोई चिकित्सक नहीं है, इसलिए बच्चों की भर्ती नहीं ली जा रही हैै।

अब तक 34 बच्चे हुए स्वस्थ
जानकारी अनुसार इस जच्चा-बच्चा केंद्र में जब से इलाज शुरू हुआ है तब से कुल 51 नवजात बच्चे भर्ती हुए हैं। इनमें से 34 बच्चे स्वस्थ होकर अस्पताल से घर लौट चुके हैं। वहीं 11 नवजातों को उनके पालक स्वेच्छा से इस अस्पताल से अन्य जगह इलाज कराने के लिए ले गए। कहा जाए इस केंद्र के शुरू होने से जिलेवासियों को नवजात बच्चों के मामले में बड़ी राहत मिल रही थी, पर वर्तमान स्थिति ने पालकों की परेशानी बढ़ा दी है।

अस्पताल में नहीं है एक भी सहायक चिकित्सक
यहां विडंबना है कि करोड़ों की लागत से बनाए गए जच्चा-बच्चा केंद्र में एक भी सहयोगी शिशु रोग विशेषज्ञ नहीं हैं। किसी कारण से विशेषज्ञ चिकित्सक छुट्टी पर हैं, तो जिलेभर से आने वाले बीमार नवजात बच्चों को देखने वाला कोई नहीं है। अत्याधुनिक उपकरणों से लैस इस केंद्र में पूरी सुविधा है, पर स्टॉफ की कमी के कारण करोड़ों की सुविधा का जिलेवासियों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।

जिनकी ड्यूटी लगी वे इस अस्पताल के नहीं
जच्चा-बच्चा केंद्र में जिन चिकित्सकों की डयूटी लगाईं गई है वे जिला अस्पताल के चिकित्सक हैं। केंद्र में बच्चों के इलाज के लिए अलग से चिकित्सक व स्टॉफ नर्सों की भर्ती होनी है, पर अभी तक इस अस्पताल में केंद्र व राज्य सरकार ने एक भी चिकित्सक की भर्ती नहीं कर पाई है जिसका खामियाजा अब जिलेवासियों को भुगतान पड़ रहा है। चिकित्सकों के अभाव में करोड़ों का जच्चा-बच्चा केंद्र पिछले 2३ दिनों से बंद है।

करना पड़ेगा चिकित्सक के स्वस्थ होने का इंतजार
अब इस अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक जब तक स्वस्थ नहीं हो जाते तब तक केंद्र बन्द रहेगा। शासन-प्रशासन इस ओर जल्द ध्यान नहीं दिया तो मशीनों में धूल जमती जाएगी। जच्चा-बच्चा केंद्र को नियमित चलाने के लिए शासन स्तर पर नियमित चिकित्सकों की भर्ती करनी ही होगी। बता दें कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने दिसम्बर 2017 में इस केंद्र का उद्घाटन किया था, उसके बाद 29 दिसम्बर 2017 से कलक्टर के माध्यम से यहां नवजात बीमार बच्चों का इलाज शुरू किया गया।

अब तक 13 बच्चों को भेजा गया बाहर
इस अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ दुर्घटना में घायल हैं। वे एक माह की छुट्टी पर हैं। इस केंद्र में किसी भी प्रकार के नवजात बच्चों का इलाज नहीं हो रहा है। अब तो स्थिति यह हो गई है कि जब भी कोई पालक नवजात बच्चे को केंद्र में लेकर आते हैं तो स्टॉफ नर्स यही कहती हैं कि यहां अब इलाज नहीं हो रहा है। डॉक्टर दुर्घटनाग्रस्त हैं। यह स्थिति बीते 2३ दिनों से है।

सिविल सर्जन भी हैं शिशु रोग विशेषज्ञ
बता दें कि जच्चा-बच्चा केंद्र के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रीमाली घायल हैं। मामले में स्टॉफ का कहना है चाहें तो व्यवस्था संभालने के लिए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन एसपी केसरवानी बच्चों की देख-रेख कर सकते हैं, पर जिला प्रशासन भी इस मामले में अब तक अनजान हैं। व्यवस्था दुरूस्त करने के लिए किसी प्रकार की कोई पहल नहीं की जा रही है। नतीजा ये है कि सारी सुविधाओं के बाद भी यहां की स्थिति दयनीय है।

Published on:
11 May 2018 10:54 am