
डौंडीलोहारा विकासखंड के ग्राम किसना में ग्रामीणों एवं सरपंच व पंचो के बीच तकरार से गांव में विकास कार्य ठप हो गया है। साथ ही ग्रामीणों को मनरेगा के तहत रोजगार भी नहीं मिल रहा हैं। ग्रामीणों ने सरपंच को दोषी मानते हुए गांव से बहिष्कृत कर दिया है। सरपंच का साथ देने वाले उपसरपंच व दो पंचो को भी गांव से बहिष्कृत कर दिया है। बहिष्कृत सरपंच डोमेश्वरी साहू, उपसरपंच टेमिन निषाद, पंच डोमेश्वर पटेल व मालती साहू ने कहा कि लगता है हम लोगों ने सरपंच व पंच का चुनाव जीतकर गुनाह किया, जिसकी सजा ग्रामीण हमें गांव से बहिष्कृत कर रहे हैं। मामले में इन लोगों ने गांव प्रमुख चंद्रेश साहू सहित पांच ग्रामीणों के नाम से कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत की है। पीडि़त लोगों ने कहा कि हमें गांव में प्रताडि़त किया जा रहा है। न्याय की मांग को लेकर पुलिस विभाग में भी आवेदन दिया है।
बीते नवंबर 2025 में ग्राम पंचायत के रोजगार सहायक राजेंद्र साहू ने मोबाइल में आपत्तिजनक स्टेटस लगाया था। जिस पर ग्रामीणों को आपत्ति हुई, जब रोजगार सहायक पर कार्रवाई करने आवेदन में हस्ताक्षर करने कहा तो सरपंच डोमेश्वरी ने कहा कि जो भी लिखा हैं, सही लिखा है, गलत क्या है और हस्ताक्षर नहीं करने की बात कही। इससे ग्राम प्रमुख व अन्य लोग नाराज हो गए।
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किसना की सरपंच डोमेश्वरी ने बताया कि सरपंच बनने के बाद पंचायत का कार्यभार संभाला तो गांव में शासकीय संपत्ति उपयोग के लिए टैक्स बढ़ाया गया। स्वछताग्राहियों के लिए प्रति राशन कार्ड 30 रुपए की राशि लेने का निर्णय लिया गया। कई लोगों ने इसका विरोध किया। रोजगार सहायक ने मनोरजन के लिए अपने वाट्सऐप स्टेटस पर विवादित पोस्ट डाला। गांव के कई लोगों ने इस पोस्ट का विरोध किया और माहौल खराब हुआ। लेकिन रोजगार सहायक ने कोई गलत पोस्ट नहीं किया था।
जनपद पंचायत के मुताबिक सरपंच, पंच व ग्रामीणों के आपसी वाद- विवाद से गांव में विकास कार्य ठप है। यहां कोई विकास कार्य नहीं हो रहा हैं। मामला कब सुलझेगा. जांच के बाद ही पता चलेगा। इस गांव में सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव भी लाया गया था, जिसमें सरपंच के पक्ष में ज्यादा पंचों ने मतदान किया था। जिससे प्रस्ताव गिर गया था। बताया जा रहा है कि कुछ पंच ऐसे थे, जो गांव के पक्ष में थे, लेकिन मतदान में सरपंच के पक्ष में मतदान किया। जिसके बाद मामला और बढ़ गया।
स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों के बीच विवाद से विकास कार्य बाधित होते हैं। इसका सीधा असर जनता पर पड़ता है। मनरेगा जैसे रोजगारपरक कार्य रुकने से ग्रामीणों की आजीविका प्रभावित होती है। ऐसे मामलों में प्रशासन को त्वरित हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराना चाहिए। शांतिपूर्ण समाधान और विकास कार्यों को प्राथमिकता देना जनहित के लिए अपरिहार्य है, जिससे गांव की प्रगति हो सके।
ग्राम किसना के ग्राम प्रमुख चंद्रेश साहू ने कहा कि हम भी चाहते हैं कि मामला जल्द सुलझे। सरपंच जो प्रताड़ना का आरोप लगा रही हैं, वह गलत हैं। मामले को लेकर मैं खुद थाना आया हूं और जल्द मामला सुलझाने की मांग थाना प्रभारी से भी की हैं।
जनपद पंचायत डौंडीलोहारा सीईओ पंकज देव ने कहा कि यह प्रशासनिक मामला नहीं है। मामला ग्रामीणों व ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों के बीच का है। आपसी वाद-विवाद के कारण इस गांव में अभी विकास कार्य रुका हुआ हैं।
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Updated on:
22 Jun 2026 11:08 pm
Published on:
22 Jun 2026 11:08 pm
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