
सरकारी अभियानों और पुलिस कार्रवाई के भरोसे बैठने के बजाय छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के बालोद (Balod) जिले के कई गांवों ने सामाजिक बुराइयों को जड़ से मिटाने की ज़िम्मेदारी खुद अपने कंधों पर उठा ली है। ग्रामीणों ने एकजुट होकर कड़े नियम बनाए, भारी जुर्माना तय किया और 24 घंटे निगरानी की ठोस व्यवस्था खड़ी कर दी। इस अनूठी सामुदायिक पहल का नतीजा यह है कि घुमका, पोंडी, कुरदी, जगन्नाथपुर, बघमरा और सुरडोंगर-मरकाटोला गांव में अवैध शराब की बिक्री, शराब पीकर हुल्लड़बाजी और जुआ-सट्टा के मामलों पर पूरी तरह से लगाम लग गई है।
घुमका - यहाँ 2022 से शराब बेचने और खरीदने पर 51,000 रुपए का भारी दंड निर्धारित है। महिला समिति कमान संभालती है। इससे महिलाओं में सुरक्षा की भावना बढ़ी है और आसपास के 10 गांव भी इस मॉडल को अपना रहे हैं।
सुरडोंगर-मरकाटोला - वनांचल के इस गांव की ग्रामसभा ने पूर्ण नशाबंदी का प्रस्ताव पास किया है। घर में नशा करते पकड़े जाने पर 3,500 रुपए और अवैध शराब बनाने पर 35,000 रुपए जुर्माना तय है। सूचना देने वाले को 5,000 रुपए का इनाम दिया जाता है।
जगन्नाथपुर - जगन्नाथपुर (सांकरा) की ग्राम समिति में अध्यक्ष से लेकर सदस्य तक सभी महिलाएं हैं। ग्राम अध्यक्ष कोमिन साहू के नेतृत्व में महिलाओं ने शराबखोरी और हुल्लड़बाजी रोकने के लिए 25,000 रुपए का जुर्माना तय किया है।
पोंडी - तीन साल पहले अवैध शराब और जुआ-सट्टा पर 25,000 रुपए जुर्माना लागू किया गया था। सरपंच दिनेश्वरी साहू के मुताबिक नियम तोड़ने वालों से कड़ाई से वसूली की गई, जिसके बाद से ऐसे मामलों पर विराम लग गया।
कुरदी - कुरदी में शराब बेचने पर 10,000 और खरीदने पर 15,000 रुपए का जुर्माना है। सरपंच संजय कुमार की पहल पर गांव में सीसीटीवी कैमरे लगाकर आधुनिक निगरानी की जा रही है।
बघमरा - बघमरा में भी कुरदी की तर्ज पर कड़ाई बरती जा रही है।
बालोद थाना प्रभारी शिशुपाल सिन्हा का कहना है कि ग्रामीणों की इस सजगता से क्षेत्र में अपराध लगभग 90% तक कम हो गए हैं। घुमका जैसे गांवों में बीते दो-तीन सालों से अवैध शराब बिक्री का एक भी मामला सामने नहीं आया है। जुआ-सट्टा थमने से सामाजिक माहौल सुधरा है और पुलिस अन्य गांवों को भी इस मॉडल को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है।