
अछोली आत्मानंद स्कूल (photo Patrika)
Balod School News: अछोली आत्मानंद स्कूल में 548 बच्चे हैं, लेकिन यहां शिक्षकों की कमी है। शिक्षकों की कमी दूर करने स्कूल प्रबंधन समिति ने दो निजी शिक्षक अस्थायी तौर पर रखने का निर्णय बैठक में लिया है। स्कूल प्रबंधन का कहना है शिक्षकों की कमी है इसलिए दो शिक्षकों की नियुक्ति शाला प्रबंधन समिति स्वयं कर रही है, जिससे पढ़ाई प्रभावित न हो। इसलिए स्कूल के सभी बच्चों से 400-400 रुपए मंगाए जा रहे हैं। इससे दोनों अस्थाई शिक्षकों का वेतन दिया जाएगा। इस निर्णय को कई पालकों ने गलत बताया है। शिक्षकों की भर्ती व उन्हें वेतन देने की जवाबदारी सरकार की है। बच्चों से रुपए मंगाना गलत है।
तीन साल से इस स्कूल में अंग्रेजी व राजनीति विज्ञान शिक्षक की कमी है, जिससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। बच्चों और पालकों की ओर से तीन साल से शिक्षक की मांग की जा रही है। शासन-प्रशासन ध्यान नहीं दे रहा है। इसलिए समिति ने अपने स्तर पर शिक्षक रखने का निर्णय लिया।
अछोली का आत्मानंद स्कूल राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के तहत चलता है। यहां गरीब, आदिवासी और किसान के बच्चे बेहतर भविष्य की उम्मीद में आते हैं। स्कूल में महीनों से कई शिक्षकों के पद खाली हैं। सिलेबस पिछड़ रहा है। शिक्षा विभाग व शासन आंख मूंदे हैं। न नई भर्ती, न ट्रांसफर, न कोई वैकल्पिक व्यवस्था।
शिक्षा का अधिकार कानून कहता है कि 8वीं तक निशुल्क शिक्षा दी जाएगी। आत्मानंद में कोई फीस नहीं लेने की व्यवस्था है। फिर शिक्षक के नाम पर 400 रुपए क्यों लिए जा रहे हैं। सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाडक़र खर्च माता-पिता पर डाल रही है।
राज्य सरकार आत्मानंद स्कूलों को ब्रांड बनाकर पेश करती है। दावा है कि गरीब का बच्चा भी अंग्रेजी माध्यम में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पाएगा। अछोली की घटना बता रही है कि अंदर से सिस्टम खोखला है। शिक्षकों की भारी कमी, बजट का अभाव और एसएमसी पर पूरा बोझ डाल देना।
अछोली स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय के शाला प्रबंधन समिति अध्यक्ष रामेश्वर सिंह ने बताया कि स्कूल में शिक्षकों की कमी है। स्कूल में पढ़ाई प्रभावित न हो, इसलिए ग्रामीणों व बच्चों के पालकों की सहमति से ही प्रति स्कूली बच्चे 400-400 रुपए लाने का निर्णय लिया गया है। जिससे 10 हजार महीने का वेतन 6-6 हजार रुपए प्रति माह के अनुसार दिया जा सके।
स्कूल में शिक्षक देना राज्य सरकार और शिक्षा विभाग की संवैधानिक जिम्मेदारी है। पद खाली हैं तो इसकी भरपाई पालकों की जेब से क्यों किया जा रहा है। अब हर सरकारी स्कूल में स्कूल प्रबंधन समिति को चंदा मांगना पड़ रहा है। समिति के इस निर्णय से पालकों में नाराजगी है।
इसकी जानकारी मिली है कि शाला प्रबंधन समिति अपने स्तर पर शिक्षक भर्ती कर उनको मानदेय देने का निर्णय लिया है। इसकी पूरी जानकारी लेता हूं। इसके के बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी।
प्रभारी प्राचार्य विजय कुमार गांवरे ने कहा स्कूल में शिक्षकों की कमी है, इसलिए शाला प्रबंधन समिति ने यह निर्णय लिया है, जिससे पढ़ाई प्रभावित न हो। शासन से जैसे ही शिक्षकों की भर्ती कर दी जाएगी, फिर दिक्कत नहीं होगी। रही बात जमा राशि की तो शिक्षकों की नियुक्ति के बाद शाला प्रबंधन समिति की बैठक कर राशि वापस कर दी जाएगी। यह भी निर्णय बैठक में हुआ है।
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Updated on:
17 Aug 2026 02:51 pm
Published on:
17 Aug 2026 02:51 pm
