बालोद जिले के डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के गुरामी जंगल में 24 जनवरी को मिली महिला की लाश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस जांच में कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। महिला की हत्या उसके ही सिरफिरे प्रेमी नेमीचंद साहू ने की थी। प्रेमी ने ही जंगल में गला दबाकर उसे बेहोश किया […]
बालोद जिले के डौंडीलोहारा थाना क्षेत्र के गुरामी जंगल में 24 जनवरी को मिली महिला की लाश की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। पुलिस जांच में कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। महिला की हत्या उसके ही सिरफिरे प्रेमी नेमीचंद साहू ने की थी। प्रेमी ने ही जंगल में गला दबाकर उसे बेहोश किया और फिर पत्थर से कुचलकर हत्या कर दी। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया है।
थाना प्रभारी मुकेश सिंह के मुताबिक गुरामी निवासी एक व्यक्ति 24 जनवरी को सुबह 10 बजे जंगल की ओर लकड़ी लेने गया। जहां उसे तेज बदबू आई। नजदीक जाकर देखा तो किसी इंसान के पैर की उंगलियां नजर आई। इसके बाद गांव के लोगों ने थाने पहुंचकर जानकारी दी। पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के बड़े अफसर, साइबर सेल, डॉग स्क्वायड और फॉरेंसिक टीम पहुंची। पत्थर को हटाकर देखा गया तो महिला की सड़ी गली लाश मिली। 16 जनवरी को एक महिला की गुमशुदगी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। उसी महिला के भाई को मौके पर बुलाया गया। महिला के हाथ में बने टैटू और उसके पहनावे को देखा तब शव की पहचान हो गई। वह उसकी बहन कमला राजपूत थी।
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पुलिस ने मर्ग पंचनामा कर लाश को पास्टमार्टम के लिए भेज दिया। गुमशुदगी रिपोर्ट के दौरान पुलिस को परिजनों ने महिला का मोबाइल नंबर दिया था। जब महिला गायब हुई थी, उसी दिन घर से निकलने से पहले हुए कॉल रिकॉर्ड के आधार पर पुलिस ने तरौद निवासी नेमीचंद को संदेह के आधार पर हिरासत में लेकर पूछताछ की। कड़ाई से पूछने पर नेमीचंद ने हत्या करना कबूल किया।
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पुलिस ने आरोपी नेमीचंद साहू के हवाले से बताया कि उसके और कमला के बीच प्रेम संबंध था। 16 जनवरी को कमला दोपहर 2 बजे अपने घर से निकली थी। दोनों नेमीचंद की मोटरसाइकिल से गुरामी के जंगल पहुंचे। दोनों इसी जंगल में मुलाकात करते थे। जंगल पहुंचने पर उसने पहले शराब पी। नेमीचंद ने कमला से शादी करने और घर चलने का प्रस्ताव रखा, लेकिन कमला ने इनकार कर दिया। इसी को लेकर दोनों के बीच विवाद बढ़ा और नेमीचंद ने उसका गला घोट दिया। महिला बेसुध होकर जमीन पर गिर गई। नेमीचंद उसे घसीटते हुए जंगल के निचले हिस्से में ले गया। तब तक कमला की सांसें चल रही थी। नेमीचंद ने कमला को गड्ढे में रखकर बड़े भारी पत्थर से सिर को कुचल दिया, जिससे उसकी पहचान न हो सके। साक्ष्य मिटाने के लिए आरोपी ने कमला के शरीर को पत्थरों से ढंक दिया।
घटना को अंजाम देने के बाद कमला के फोन पर लगातार उनके परिजनों का फोन आ रहा था, तब नेमीचंद उसका मोबाइल लेकर अपने घर चले गया। रातभर सो गया। सुबह काम के लिए ट्रेन से दुर्ग गया। दुर्ग रेलवे स्टेशन पहुंचने पर कमला के परिजनों का कॉल आया तो नेमीचंद ने मोबाइल को पटककर तोड़ दिया और रेलवे ट्रैक पर फेंक दिया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर कमला की टूटी चूडिय़ां, हत्या को अंजाम देने वाले पत्थर, शराब की शीशी, कमला का मोबाइल बरामद कर लिया।