CG News: बलौदा बाजार जिले के पीएम श्री स्कूल टुण्ड्रा का है, जहां पदस्थ शिक्षक वागेंद्र देवांगन का युक्तियुक्तकरण के तहत ट्रांसफर तो सिमगा ब्लॉक के प्राथमिक शाला कंजिया पथरा किया गया था, लेकिन कथित साठगांठ के चलते वे पुन: पुराने विद्यालय टुंड्रा में ही पदस्थापित कर दिए गए।
CG News: शिक्षा विभाग में नियमों की अनदेखी और मनमानी पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सरकार द्वारा बनाए गए युक्तियुक्तकरण नियमावली को धता बताते हुए विभागीय अधिकारियों पर शिक्षक हित में पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लग रहे हैं। ताजा मामला बलौदा बाजार जिले के पीएम श्री स्कूल टुण्ड्रा का है, जहां पदस्थ शिक्षक वागेंद्र देवांगन का युक्तियुक्तकरण के तहत ट्रांसफर तो सिमगा ब्लॉक के प्राथमिक शाला कंजिया पथरा किया गया था, लेकिन कथित साठगांठ के चलते वे पुन: पुराने विद्यालय टुंड्रा में ही पदस्थापित कर दिए गए।
जानकारों का कहना है कि शिक्षक का इस तरह पुन: उसी स्कूल में पदस्थ होना पूर्णत: नियमविपरीत है। दरअसल, युक्तियुक्तकरण नीति के तहत अतिरिक्त शिक्षकों को कम स्टाफ वाले स्कूलों में भेजा जाना है। इसी नियम के अंतर्गत वागेंद्र देवांगन का नाम अतिशेष सूची में डाला गया और उन्हें प्राथमिक शाला कंजिया पथरा (सिमगा ब्लॉक) में भेजा गया था। लेकिन उन्होंने वहां ज्वाइन नहीं किया और उच्च अधिकारियों के पास पुनर्विचार हेतु अभ्यावेदन लगा दिया।
यहीं से पूरा खेल प्रारंभ हुआ। अभ्यावेदन के नाम पर अधिकारियों से कथित साठगांठ कर उन्हें पुन: उसी पीएम श्री स्कूल टुंड्रा में पदस्थ कर दिया गया, जहां से उन्हें अतिशेष मानते हुए हटाया गया था। तो फिर से कैसे उसी स्कूल में पदस्थापना दिया गया। हैरानी की बात यह है कि इस विद्यालय में पहले से ही दो शिक्षक पदस्थ हैं, जहां कुल छात्र संख्या महज 46 ही है। जबकि सरकार 1+60 की बात कहते हुऐ अतिशेष निकाली थीं।
सवाल उठना लाजमी है जब पीएम श्री टुण्ड्रा से बच्चों के दर्ज संया से शिक्षक का अनुपात बराबर है तो पहले अतिशेष क्यों निकला गया और जब अतिशेष में सिमगा ब्लॉक मीला तो फिर टुण्ड्रा में पदस्थापन क्यो दी गई, क्या विभाग एक व्यक्ति के लिए अलग से नियम बनाता है या नियम कानून से अंजान हैं।
वागेंद्र देवांगन का विवादों से पुराना नाता है। पूर्व में भी ग्रामीणों की शिकायत पर इन्हें करीब चार महीने तक विकासखंड शिक्षा कार्यालय कसडोल में अटैच करके रखा गया था। इसके बावजूद विभाग ने उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई नहीं की। युक्तियुक्तकरण के आदेश लागू होने पर भी इन्हें अतिशेष की सूची में डालकर दूसरी जगह भेजा गया था, लेकिन विभागीय अधिकारियों की मेहरबानी से यह आदेश कागजों तक ही सीमित रह गया। नियम के विरुद्ध क्षमायाचना दे दिया गया।
इस पूरे घटनाक्रम से ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि शिक्षा विभाग की ढिलाई और शिक्षकों की मनमानी का सीधा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। विद्यालय में पहले से पर्याप्त शिक्षक मौजूद होने के बावजूद एक शिक्षक को नियमों के विरुद्ध वहीं बनाए रखना, और फिर उनके विद्यालय से गायब रहने पर भी चुप्पी साध लेना गंभीर सवाल खड़े करता है।
सूत्रों के अनुसार, वागेंद्र देवांगन ने औपचारिकता के तौर पर ज्वाइनिंग तो कर ली, लेकिन एक महीने से विद्यालय से नदारद हैं। न तो स्कूल में उपस्थिति दर्ज हो रही है और न ही बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। इसके बावजूद विभागीय स्तर पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि यह शिक्षा विभाग की लापरवाही का बड़ा उदाहरण है। जिसकी शिकायत ग्रामीणों ने उच्च अधिकारियों से किया है।