
Chhattisgarh News: 2014 बैच के आईएएस अधिकारी और बलौदाबाजार भाटापारा कलेक्टर कुलदीप शर्मा खाद्य सुरक्षा अभियान के तहत ‘बने खाबो, बने रहिबो 2.0’ अभियान की शुरुआत की है। दरअसल आगामी रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए आम नागरिकों को सुरक्षितए शुद्धए गुणवत्तापूर्ण और मानक खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराने के उद्देश्य से कलेक्टर ने नई पहल की है। अभियान के तहत जिले में सात दिवसीय सघन खाद्य सुरक्षा प्रवर्तन एवं जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। राज्य शासन के निर्देश पर शुरू हुआ यह अभियान आगामी रविवार तक पूरे जिले में संचालित किया जाएगा।
अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा दल मिठाई दुकानों, कन्फेक्शनरी निर्माताओं, डेयरियों, बेकरी इकाइयों, होटल, रेस्टोरेंट और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं के परिसरों की जांच करेंगे। त्योहारी सीजन में खाद्य पदार्थों में मिलावट, मिथ्याछाप, भ्रामक प्रस्तुतीकरण, असुरक्षित खाद्य सामग्री और प्रतिबंधित एनालॉग डेयरी उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण एवं विक्रय पर विशेष नजर रखी जाएगी।
बाजार में प्लास्टिक के जार या डिब्बों में बिना लेबल, निर्माता का नाम और संघटक सामग्री की जानकारी के बेची जा रही मिठाइयों तथा भ्रामक नाम से बिकने वाली खाद्य सामग्री को विशेष रूप से जांच के दायरे में लिया जाएगा।
31 जुलाई की राजपत्र अधिसूचना के तहत ऐसे अमानकीकृत डेयरी एनालॉग या गैर-दुग्ध, लेकिन दुग्ध उत्पाद जैसे दिखाई देने वाले खाद्य पदार्थ, जिनसे उपभोक्ताओं को वास्तविक दुग्ध उत्पाद होने का भ्रम हो, उनके विक्रय पर कार्रवाई की जाएगी। निरीक्षण के दौरान संदिग्ध खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भेजे जाएंगे।
विभाग ने नागरिकों से पैकेटबंद मिठाइयां और खाद्य सामग्री खरीदते समय लेबल की जानकारी जांचने तथा बिल लेने की अपील की है। त्योहारी सीजन में मिठाइयों की मांग बढऩे के साथ खोया, मावा, खाद्य रंग और चांदी के वर्क में मिलावट की आशंका भी बढ़ जाती है। अधिक मुनाफे के लिए कुछ कारोबारी घटिया या नकली विकल्पों का इस्तेमाल कर सकते हैं। ऐसे में उपभोक्ताओं को भी खरीदारी के दौरान सतर्क रहने की जरूरत है।
जांच रिपोर्ट में मिलावट या अमानकता पाए जाने पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत वैधानिक और दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने सभी खाद्य कारोबारियों को निर्देश दिए हैं कि त्योहार के दौरान खाद्य पदार्थों का निर्माण और विक्रय स्वच्छता एवं गुणवत्ता मानकों के अनुरूप ही करें। बिना खाद्य पंजीयन या लाइसेंस संचालित अस्थायी स्टॉलों तथा शहरी क्षेत्रों से ग्रामीण हाट-बाजारों तक होने वाली संदिग्ध मिठाइयों की सप्लाई चेन पर भी निगरानी रखी जा रही है।
खोया या मावा में स्टार्च, मैदा, सिंथेटिक दूध, यूरिया और डिटर्जेंट जैसी मिलावट की आशंका रहती है।
खाद्य रंग: मिठाइयों को आकर्षक बनाने के लिए प्रतिबंधित या हानिकारक रासायनिक रंगों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
चांदी का वर्क: चांदी के स्थान पर सस्ती और स्वास्थ्य के लिए हानिकारक धातु की पन्नी के इस्तेमाल की आशंका रहती है।
तेल और घी: वनस्पति घी, रिफाइंड या सस्ते पाम ऑयल का गलत तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।
ड्राई फ्रुट्स: पुराना, खराब या निम्न गुणवत्ता का काजू, बादाम और मखाना मिलाए जाने की आशंका रहती है।