
शराबियों का अड्डा (फोटो सोर्स- पत्रिका)
Baloda Bazar Gandhi Smriti: राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ऐतिहासिक पदचिह्नों और उनकी यादों से जुड़ा बलौदा बाजार का पुराना कृषि उपज मंडी प्रांगण आज प्रशासनिक उदासीनता और उपेक्षा का दंश झेल रहा है। 93 वर्ष पूर्व जिस पावन स्थल पर बापू ने छुआछूत और भेदभाव को मिटाने का अमिट संदेश दिया था, आज वह ऐतिहासिक धरोहर उचित देखरेख के अभाव में पूरी तरह बदहाल हो चुकी है।
इतिहास के पन्नों के अनुसार, 26 नवंबर 1933 को अपने छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान महात्मा गांधी बलौदा बाजार पहुंचे थे। उस दौर में यह क्षेत्र एक छोटा ग्राम था और पुराना कृषि उपज मंडी प्रांगण ही सामाजिक एवं राजनीतिक सभाओं का मुख्य केंद्र हुआ करता था। यहां पहुंचकर बापू ने अस्पृश्यता और भेदभाव के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए प्रांगण स्थित कुएं से एक दलित युवक के हाथों जल निकलवाकर ग्रहण किया था। इसके अलावा, उन्होंने पुरानी बस्ती स्थित प्राचीन मावली मंदिर और तत्कालीन जगन्नाथ मंदिर (वर्तमान गोपाल मंदिर) में भी दलितों के साथ प्रवेश कर पूजा-अर्चना की थी। यह गौरवशाली घटना आज भी नगर के वयोवृद्ध लोगों के जेहन में जीवंत है।
समय के साथ जब मंडी का नवीन स्थल पर स्थानांतरण हुआ, तो पुराना परिसर धीरे-धीरे जर्जर और उपेक्षित होता चला गया। हालांकि, इस ऐतिहासिक कुएं की महत्ता को देखते हुए दिसंबर 2020 में तत्कालीन विशेष पुलिस महानिदेशक आर.के. विज ने इस परिसर का अवलोकन किया था और 96 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी भगवती प्रसाद गुप्ता से भेंट की थी।
इसके बाद तत्कालीन कलेक्टर डोमन सिंह ने इस स्थल को एक धरोहर के रूप में विकसित करने की योजना बनाई थी। योजना के तहत कुएं के आसपास उद्यान, पुरातत्व संग्रहालय, महात्मा गांधी की आदमकद प्रतिमा स्थापना और जालीदार ग्रिल लगवाने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन विडंबना यह है कि धरातल पर काम केवल कुएँ और आसपास की दीवारों की पुताई तथा जाली लगाने तक ही सीमित रह गया।
नियमित देखरेख और प्रशासनिक सख्ती न होने के कारण यह ऐतिहासिक धरोहर अपनी गरिमा और पहचान खोती जा रही है। वर्तमान स्थिति यह है कि इस पवित्र और ऐतिहासिक स्थल के इर्द-गिर्द असामाजिक तत्वों और शराबियों का अड्डा बन चुका है। जब इस स्थान का मुआयना किया गया, तो वहाँ चारों तरफ शराब की खाली बोतलें, डिस्पोजल ग्लास, पानी के पाउच और अन्य आपत्तिजनक सामग्रियां फैली हुई नजर आईं। इसके अलावा, उपेक्षा के चलते इस परिसर का उपयोग मूत्रालय के रूप में भी हो रहा है, जो यह दर्शाता है कि हमारे ऐतिहासिक और राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति समाज और प्रशासन में संवेदनशीलता कितनी कम हो गई है।
कहा जाता है कि इतिहास के गौरवशाली पल और प्रतीक ही आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा देते हैं। परंतु बलौदा बाजार के इस ऐतिहासिक गांधी स्मृति स्थल की जिस प्रकार उपेक्षा हो रही है, उससे यह गंभीर सवाल खड़ा होता है कि क्या आने वाली पीढ़ी अपने अतीत के इस स्वर्णिम इतिहास से रूबरू हो पाएगी? गांधीवादियों और स्थानीय नागरिकों ने शासन-प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि इस ऐतिहासिक स्थल को अविलंब अतिक्रमण मुक्त कराकर एक भव्य स्मारक के रूप में संरक्षित किया जाए, ताकि बापू के विचारों और उनकी स्मृतियों को संजोया जा सके।
Updated on:
13 Aug 2026 01:55 pm
Published on:
13 Aug 2026 01:55 pm
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