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MP से रायपुर तक बनेगा 6-लेन एक्सप्रेसवे, कवर्धा को मिलेगा बड़ा फायदा, 2500 करोड़ की परियोजना को केंद्र की मंजूरी

Chhattisgarh 6 Lane Expressway: मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सड़क कनेक्टिविटी को नई रफ्तार मिलने वाली है। केंद्र सरकार ने जबलपुर-मंडला-चिल्फीघाटी-कवर्धा-सिमगा होते हुए रायपुर तक 6-लेन एक्सप्रेसवे परियोजना को मंजूरी दी है।
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Jabalpur Raipur 6 Lane Expressway

जबलपुर से रायपुर तक बदलेगी तस्वीर (फोटो सोर्स- AI)

MP to Raipur Expressway: मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के बीच सडक़ कनेक्टिविटी को नई रफ्तार देने वाली बड़ी परियोजना को केंद्र सरकार ने मंजूरी दे दी है। जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा चिल्फीघाटी-कवर्धा-सिमगा होते हुए रायपुर तक जाने वाले मार्ग को 6 लेन एक्सप्रेसवे के रूप में उन्नत किया जाएगा। करीब 2500 करोड़ रुपए की लागत से होने वाला यह उन्नयन कवर्धा को मध्यभारत के बड़े इंटर-स्टेट कॉरिडोर के केंद्र में ला देगा।

केंद्र सरकार ने जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा कवर्धा-सिमगा-रायपुर 6-लेन मार्ग परियोजना को हरी झंडी दी है। दोनों परियोजनाओं के लिए कुल करीब 15 हजार करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किए जाने की जानकारी राजनांदागांव संसदीय क्षेत्र के सांसद संतोष पांडेय ने दी है। परियोजना पूरी होने के बाद जबलपुर और रायपुर के बीच सड़क यात्रा का समय लगभग आधा हो जाएगा। वहीं भोपाल से रायपुर के बीच कनेक्टिविटी भी तेज और सुगम होगी।

इस परियोजना की खास बात यह है कि कुछ दिन पहले ही सांसद संतोष पांडेय ने केंद्रीय सडक़ परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से दिल्ली में मुलाकात कर छत्तीसगढ़-मध्यप्रदेश सीमा धवईपानी से सिमगा तक फोरलेन सड़क निर्माण की मांग रखी थी। मांग पर केंद्र ने केवल फोरलेन तक सीमित रहने के बजाय पूरे कॉरिडोर को 6-लेन एक्सप्रेसवे के रूप में उन्नत करने की मंजूरी दे दी।

जबलपुर-रायपुर का सफर 4 घंटे के भीतर

वर्तमान में जबलपुर से रायपुर पहुंचने में करीब 7 से 8 घंटे लगते हैं। 6-लेन कॉरिडोर विकसित होने के बाद यह समय घटकर करीब 3.5 से 4 घंटे रहने का अनुमान है। इसी तरह रायपुर से भोपाल की सडक़ यात्रा, जिसमें अभी 14 से 15 घंटे तक लग जाते हैं, प्रस्तावित कनेक्टिविटी के बाद करीब 6 से 7 घंटे में पूरी होने की बात कही गई है।

घाटी में कटिंग चुनौतीपूर्ण

चिल्फी घाटी इस पूरे कॉरिडोर का सबसे चुनौतीपूर्ण हिस्सा मानी जा सकती है। नागमोरी घाटी के नीचे मतलब ग्राम पालक से घाटी के ऊपर चिल्फी तक करीब 8 किलोमीटर लंबे इस घाट मार्ग पर मौजूदा सडक़ टू लेन है। सामान्य मैदानी इलाके में सडक़ चौड़ी करने के लिए जमीन का विस्तार किया जा सकता है, लेकिन घाट में दोनों ओर पहाड़ होने के कारण 6 लेन के लिए अतिरिक्त चौड़ाई जुटाना आसान नहीं होगा। ऐसे में परियोजना के दौरान कई स्थानों पर पहाड़ की कटिंग करनी पड़ सकती है।

कटिंग के बाद पहाड़ी ढलानों को स्थिर रखना भी बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए रिटेनिंग वॉल, सुरक्षा संरचनाएं, जल निकासी और ढलानों की सुरक्षा के तकनीकी उपाय जरूरी होंगे। बारिश के मौसम में चिल्फी क्षेत्र में पानी और मिट्टी के बहाव को देखते हुए भूस्खलन रोकने की व्यवस्था भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।

कई जिलों के हजारों लोगों को मिलेगा लाभ

प्रस्तावित 6-लेन मध्यप्रदेश के जबलपुर और मंडला से होते हुए छत्तीसगढ़ की चिल्फीघाटी में प्रवेश करेगा। इसके बाद कवर्धा, बेमेतरा और सिमगा होते हुए रायपुर से जुड़ेगा। इस मार्ग के चौड़ा और बेहतर होने से दोनों राज्यों के बीच माल परिवहन, व्यापार, उद्योग और पर्यटन को भी गति मिलने की उम्मीद है। 6-लेन का सीधा फायदा कवर्धा और आसपास के जिलों को भी मिलेगा। चिल्फीघाटी से रायपुर तक तेज कनेक्टिविटी मिलने के बाद कवर्धा की मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के प्रमुख शहरों के बीच पहुंच और मजबूत होगी। खासकर व्यापारिक वाहनों के लिए यात्रा समय कम होने से परिवहन लागत घटने की संभावना है।

सैकड़ों पेड़ों की होगी कटाई

प्रस्तावित 6-लेन सड़क में प्रत्येक लेन की मानक चौड़ाई करीब 3.5 मीटर होती है। इस लिहाज से दोनों दिशाओं की छह लेन का कैरिजवे करीब 21 मीटर चौड़ा होगा। इसके अलावा मीडियन, शोल्डर, सुरक्षा दीवार, ड्रेनेज और अन्य सड़क संरचनाओं के लिए अतिरिक्त जगह की जरूरत होगी। चिल्फीघाटी में मौजूदा सड़क टू-लेन है और करीब 8 किलोमीटर लंबे घाट में एकओर पहाड़ी ढलान हैं। ऐसे में 6-लेन के लिए जरूरी चौड़ाई निकालना आसान नहीं होगा। सडक़ चौड़ीकरण के लिए पांच किलोमीटर से अधिक पहाड़ी हिस्से में बड़े पैमाने पर पहाड़ की कटिंग करनी पड़ेगी। इसके दायरे में आने वाले वन क्षेत्र में सैकड़ों पेड़ों की कटिंग भी संभावित है।

यह पूरा इंटरस्टेट कॉरिडोर मध्यभारत की बड़ी लाइफलाइन बनने जा रहा है। सडक़ कनेक्टिविटी बेहतर होने से व्यापार और आवागमन के साथ छत्तीसगढ़ आने वाले पर्यटकों को भी लाभ मिलेगा। कवर्धा का भोरमदेव, चिल्फी और आसपास के पर्यटन क्षेत्र भी बेहतर सड़क नेटवर्क से जुड़ेंगे। - संतोष पाण्डेय, सांसद