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Kawardha News: आजादी के 80 साल बाद भी गंदा पानी पीने को मजबूर 35 बैगा परिवार, बोले- मौत हुई तो जिम्मेदार कौन?

Dirty Drinking Water: कबीरधाम के बेलापानी गांव में बैगा जनजाति के 35 परिवार स्वच्छ पेयजल के अभाव में बारिश के दौरान दूषित नदी का पानी पीने को मजबूर हैं।
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Kawardha News

Kawardha News: 35 बैगा परिवारों के हिस्से आया सिर्फ गंदा पानी(photo-patrika)

Kawardha News: देश 15 अगस्त को 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारियों में जुटा है, लेकिन छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो विकास के दावों पर सवाल खड़े करती है। ग्राम पंचायत राजाढार के आश्रित गांव बेलापानी में रहने वाले बैगा जनजाति के करीब 35 परिवार आज भी स्वच्छ पेयजल के लिए तरस रहे हैं। बरसात के मौसम में ये परिवार मजबूरी में नदी का मटमैला और दूषित पानी पीने को विवश हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत और मांग के बावजूद अब तक कोई स्थायी व्यवस्था नहीं की गई।

Drinking Water Crisis: 35 बैगा परिवारों के सामने पेयजल का गंभीर संकट

बेलापानी गांव के बैगा परिवारों के लिए पीने का साफ पानी सबसे बड़ी समस्या बन गया है। बारिश के दिनों में नदी का पानी पूरी तरह मटमैला हो जाता है, लेकिन मजबूरी में ग्रामीणों को उसी पानी का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। महिलाएं और बच्चे रोजाना नदी से पानी भरकर घर लाते हैं और उसी से पीने से लेकर घरेलू जरूरतें पूरी करते हैं।

गंदा पानी पीने से स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर

ग्रामीणों का कहना है कि दूषित पानी पीने के कारण अक्सर लोग बीमार पड़ जाते हैं। बारिश और बाढ़ के समय स्थिति और भी गंभीर हो जाती है, क्योंकि नदी का पानी अधिक गंदा हो जाता है। ऐसे में बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर सबसे ज्यादा खतरा मंडरा रहा है।

हैंडपंप की मांग के बावजूद नहीं हुई व्यवस्था

ग्रामीणों का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम पंचायत, जनपद पंचायत और प्रशासनिक अधिकारियों से गांव में हैंडपंप लगाने और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की। उनका कहना है कि उन्होंने अपनी समस्या उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा तक भी पहुंचाई, लेकिन अब तक न हैंडपंप लगाया गया और न ही कोई स्थायी पेयजल योजना शुरू की गई।

'सिर्फ आश्वासन नहीं, अब समाधान चाहिए'

ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से उन्हें केवल आश्वासन मिल रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई काम नहीं हुआ। उनका कहना है कि अब उन्हें वादे नहीं, बल्कि सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था चाहिए ताकि परिवारों को दूषित पानी पीने की मजबूरी से छुटकारा मिल सके।

ग्रामीणों का सवाल- मौत हुई तो जिम्मेदार कौन?

बेलापानी के ग्रामीणों ने प्रशासन से सवाल किया है कि यदि दूषित पानी पीने से किसी की जान जाती है, तो उसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? उनका कहना है कि समय रहते सुरक्षित पेयजल की व्यवस्था नहीं की गई तो गांव में गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा हो सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल हैंडपंप लगाने और स्थायी पेयजल सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।