अन्य मरीजों का भी यही था हाल, बाद में गर्भवती महिला को निजी क्लिनिक ले जाना पड़ा, पर्ची कटाकर डॉक्टर का घंटों किया इंतजार
रामानुजगंज. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शुक्रवार को मरीजों की भीड़ लगी रही। वहीं दोपहर में ओपीडी में डॉक्टर के नहीं बैठने से मरीज परेशान रहे। बताया जा रहा है कि डॉक्टर्स और बीएमओ मीटिंग में व्यस्त थे। इस दौरान अस्पताल पहुंची एक गर्भवती महिला दर्द से तड़पती रही, वह बार-बार बेहोश हो रही थी लेकिन उसे देखने कोई डॉक्टर नहीं आया।
ऐसे में परिजन उसे निजी क्लिनिक ले जाना पड़ा। ओपीडी का समय खत्म होने के बाद दर्जनों मरीज को बिना इलाज कराए ही वापस लौटना पड़ा। इस दौरान उनमें रोष भी देखा गया।
गौरतलब है कि रामानुजगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में रामानुजगंज के आसपास गांव के अलावा 30 से 60 किलोमीटर दूर से भी मरीज प्रतिदिन अपना इलाज कराने आते हैं। यहां प्रतिदिन ओपीडी में मरीजों की लंबी लाइन लगी रहती है। ओपीडी सुबह ८ बजे से प्रारंभ होकर दोपहर 2 बजे तक खुला रहता है,
दोपहर में डॉक्टरों के ओपीडी में नहीं बैठने से मरीज घंटों लाइन में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे। लेकिन डॉक्टर ओपीडी में नहीं बैठे, जिससे इंतजार करते कई मरीज निजी क्लिनिक का रुख किए। इस दौरान मरीजों व परिजन में बीएमओ व चिकित्सकों की कार्यप्रणाली को लेकर काफी रोष देखा गया।
बाद में मरीजों को देखा गया होगा
स्थानीय लोगों ने कहा कि बीएमओ की कार्यप्रणाली वाड्रफनगर में भी विवादित रही है, अब ऐसी ही स्थिति रामानुजगंज में भी बन रही है। इस संबंध में बीएमओ डॉ. कामिनी राय ने कहा कि बैठक चल रही थी, लेकिन बाद में मरीजों को देख लिया गया था।
शुल्क वापस करने हंगामा
जीवनदीप समिति के लिए काटे जाने वाली 10 रुपए की पर्ची कटाकर मरीज घंटों लाइन में खड़े थे लेकिन डॉक्टर के ओपीडी में नहीं बैठने से नाराज मरीज पर्ची काउंटर पर जाकर रुपए मांगने लगे। इस दौरान हंगामे की स्थिति बनी रही।
दर्द से कराहती रही गर्भवती महिला
ग्राम विजयनगर की एक गर्भवती महिला भी दर्द होने पर उपचार हेतु अस्पताल पहुंची थी। वह भी पर्ची कटाकर परिजन के साथ लाइन में खड़ी थी, उसे दर्द इतना ज्यादा था कि वह बार-बार बेहोश हो जा रही थी। घंटों इंतजार के बाद भी डॉक्टर के नहीं बैठने पर परिजन उसे निजी क्लिनिक ले गए।
मीटिंग में व्यस्त थे चिकित्सक
एक ओर मरीज लाइन में घंटों खड़े रहकर परेशान थे तो वहीं कई गंभीर तड़प भी रहे थे। लेकिन बीएमओ सहित अन्य चिकित्सक मीटिंग में व्यस्त थे। वहां कोई मरीज जाने की हिम्मत भी करता तो उसे डांट कर भगा दिया जा रहा था।