बलरामपुर

अपनी बूढ़ी मां पर अत्याचार कर रहा बीजेपी नेता, सत्ता के रसूख पर पुलिस नहीं कर रही कार्रवाई

सत्ता के नशे में चूर बीजेपी नेता का अत्याचार उसकी अपनी ही बूढ़ी मां को भुगतना पड़ रहा है।
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Updated: 23 May 2018, 2:42 PM IST
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अपनी बूढी मां पर अत्याचार कर रहा बीजेपी नेता, सत्ता के रसूख पर पुलिस नही कर रही कार्रवाई

बलरामपुर. सत्ता के नशे में चूर बीजेपी नेता का अत्याचार उसकी अपनी ही बूढ़ी मां को भुगतना पड़ रहा है। पैतृक सम्पत्ति के विवाद को लेकर बीजेपी नेता ने न सिर्फ अपनी मां और सबसे छोटे भाई को मारा-पीटा बल्कि घर से बाहर निकाल दिया। अपने ही नेता-पुत्र के अत्याचार से त्रस्त बूढी मां ने डीएम से न्याय की गुहार लगाई है।

हाथ में प्रार्थनापत्र लिये एक बूढ़ी मां डीएम कार्यालय के सामने अपनी बारी का इंतजार कर रही है। इस बूढ़ी मां को शिकायत अपने ही बेटे से है जो बीजेपी का जिलामंत्री है। इस बूढ़ी और बेबस मां का नाम श्याम प्यारी गुप्ता है। इनके पांच बेटे हैं। सबसे बड़ा बेटा विजय गुप्ता बीजेपी का नेता है। पति की मृत्यु के बाद सम्पत्ति के बंटवारे को लेकर श्याम प्यारी के बेटों में विवाद हो गया। श्याम प्यारी ने सभी बेटों को अपनी सम्पत्ति में बराबर का हिस्सेदार बना दिया। एक हिस्से को खुद अपने पास रखकर अपनी जीविका चलाने लगी। श्याम प्यारी अपने सबसे छोटे बेटे राजेश के साथ अलग रहती है। विजय गुप्ता समेत चार भाइयों को यह नागवार गुजरने लगा। सबसे छोटे भाई राजेश गुप्ता को सम्पत्ति में हिस्सा न देने का दबाब बनाने लगे लेकिन मां के बुढ़ापे का सहारा बना सबसे छोटा बेटा राजेश अन्य भाइयों की आंख का किरकिरी बन गया। राजेश को सम्पत्ति से बेदखली को लेकर बिजय गुप्ता ने अपनी मां की भी पिटाई की और अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुये सबसे छोटे भाई राजेश और मां को घर से निकलवा दिया।

राजेश जब भी अपनी पीड़ा लेकर पुलिस के पास पहुंचता तो विजय गुप्ता अपने रसूख का इस्तेमाल करते हुये उल्टा उसे ही चलान करा देता। एक साल के भीतर पांच बार राजेश को शान्ति भंग की धाराओं में चालान किया जा चुका है। डीएम ने भी इसे पारिवारिक सम्पत्ति के विवाद का मामला बताकर इसे सुलह समझौते के आधार पर निराकरण का आश्वासन दिलाया है। अपने नेता-पुत्र के रसूख के आगे मां बेबस है और न्याय के लिये दर-दर की ठोकरे खा रही है। सत्ता का नशा यदि अपने ही मां और भाई पर अत्याचार बनकर कहर ढाये तो ऐसे में न्याय की उम्मीद करे भी तो किससे।

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