
बेंगलूरु. राज्य के राजस्व मंत्री आरवी देशपांडे ने कहा कि इस साल भी बारिश नहीं होने के कारण प्रदेश के उत्तरी क्षेत्र के 13 जिलों पर सूखे का खतरा मंडरा रहा है लिहाजा सरकार ने इससे निपटने की योजना तैयार की है। अगले दो माह में मानसून के विफल रहने की स्थिति में इस योजना को लागू किया जाएगा।
देशपांडे ने मंगलवार को यहां विभागीय समीक्षा बैठक के बाद कहा कि हालांकि मानसून के शुरुआती दौर से राज्य के 91 फीसदी हिस्से में अच्छी बारिश हुई लेकिन अब तक के आंकड़ों के हिसाब से राज्य में 3 फीसदी कम बारिश हुई है और कम बारिश वाले इलाकों में अनिश्चितता के हालात बने हुए हैं। आपात योजना के साथ ही किसी भी जटिल स्थिति का सामना करने के लिए बीज, उर्वरक तथा कीटनाशकों का स्टाक जमा करके रखा गया है। उन्होंने कहा कि 13 जिलों में इस साल कम बारिश दर्ज की गई है और यदि समय पर बारिश नहीं हुई तो करीब 8 लाख हेक्टेयर में खड़ी फसलें सूख सकती हैं।
राज्य के अधिकतर जलाशयों के पूर्णत: भर जाने के कारण करीब 19.12 लाख हेक्टेयर सिंचित क्षेत्र में किसी प्रकार की समस्या नहीं है। ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक 8.61 लाख हेक्टेयर भूमि में बुवाई हो चुकी है और 10.51 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अगले दो माह में बुवाई करवा ली जाएगी। कम से कम एक फसल लेने में कोई समस्या नहीं पेश आएगी।
उन्होंने कहा कि जहां तक बारिश पर निर्भर 55 लाख हेक्टेयर भूमि का क्षेत्र का सवाल है इसमें से करीब 37.25 लाख हेक्टेयर में बुवाई हो चुकी है और शेष 17.90 लाख हेक्टेयर भूमि में अगले दो माह में बुवाई करने की अपेक्षा है। केन्द्र सरकार द्वारा कड़ी शर्तें रखने के कारण अब तक किसी भी क्षेत्र को सूखा पीडि़त घोषित नहीं किया गया है। जिलों में राहत कार्य शुरू करने के लिए कोष की कोई समस्या नहीं है क्योंकि हर जिले को इस मद में 5 करोड़ रुपए आवंटित किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि 12 जिलों के 184 गांवों को 275 टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जा रही है। किसी भी हालात से निपटने के लिए पशुओं के लिए चारे का पर्याप्त भंडारण किया गया है। विकास आयुक्त हालात की साप्ताहिक समीक्षा करेंगे और किसी भी स्थिति से निपटने के बारे में तत्काल निर्णय करेंगे।