बैंगलोर

जैन विद्या परीक्षा में बैठे 78 प्रतिभागी

उषा चंडालिया, बरखा पुगलिया, लक्ष्मी सिंघी का विशेष सहयोग रहा।
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jainis
जैन विद्या परीक्षा में बैठे 78 प्रतिभागी

बेंगलूरु. साध्वी मधुस्मिता के सान्निध्य में 17 एवं 18 नवंबर को जैन विद्या की परीक्षाओं का आयोजन तेरापंथ सभा विजयनगर की ओर से अर्हम भवन में किया गया।

जैन विद्या भाग 1, भाग 2, भाग 3, भाग 4 ,भाग 5, भाग 6 , भाग 7, भाग 8, भाग 9 के लिए परीक्षा में 78 परीक्षार्थियों ने भाग लिया। इसमें तेरापंथ सभा अध्यक्ष बंसीलाल पीतलिया एवं केश दूधेडिय़ा और ममता बैद, उषा चंडालिया, बरखा पुगलिया, लक्ष्मी सिंघी का विशेष सहयोग रहा।

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विनम्रता जीवन का महान गुण
बेंगलूरु. बसवनगुड़ी स्थित विमलनाथ जैन मंदिर में साध्वी प्रियरंजनाश्री ने कहा कि विनय जिनशासन की नींव है। विनय ही निर्वाण का साधक है। जिस व्यक्ति में विनय नहीं है उसमें धर्म और तप टिक ही नहीं सकते हैं।

अभिप्राय यही है कि जिस प्रकार मूल के अभाव में शाखाएं तथा फल-फूल रूपी धर्म तथा तप आदि नहीं टिक सकते हैं। विनय समस्त लौकिक एवं लोकोतर सुखों का साधन है। किसी मनुष्य में भले ही सैकड़ों अन्य गुण मौजूद हों किन्तु विनय गुण नहीं है तो वे समस्त गुण शोभाहीन हैं।

Published on:
19 Nov 2018 05:30 pm