
महज जैन परिवार में जन्म लेने से कोई जैनी नहीं होता
बेंगलूरु. जैन परिवार में जन्म लेने से कोई जैनी नहीं हो जाता। सच्चा जैन वही होता है, जिसकी जीवन शैली जैनत्व के संस्कार एवं मर्यादा के अनुरूप हो। पाश्चात्य जीवन शैली और सोशल मीडिया के प्रभाव से जैन युवा पीढ़ी धर्म व संस्कारों से विमुख होती जा रही है।
यह बात साध्वी गुडिय़ा राजश्री ने रविवार को शूले अशोकनगर जैन श्रावक संघ की ओर से आयोजित जैन युवा सेमिनार में कही। दूसरे सत्र में साध्वी यशस्वी ने जैन युवाओं को सामाजिक और धार्मिक दायित्व का बोध कराया।
युवा सेमिनार के पहले दो सत्रों का संचालन जैन युवा संगठन के प्रेमकुमार कोठारी ने और अंतिम दो सत्रों का संचालन शूले संघ के सहमंत्री डॉ. रमेश गादिया ने किया।
सेमिनार के तीसरे सत्र में साध्वी जयश्री ने युवाओं के मन की बात सुनी और आवश्यक समाधान जैन संस्कारों के अनुरूप करवाए। सेमिनार के अंतिम सत्र में प्रशिक्षक राजेन्द्र दुदेडिय़ा ने कहा कि हम हमेशा युवा पीढ़ी पर दोषारोपण करते हैं।
वास्तविकता यह है कि युवा वर्ग अबोध है, गलत नहीं। समय-समय पर ऐसे सेमिनार एवं संतों के चातुर्मास हों तो युवकों को सही दिशा देकर गलत रास्ते से बचाया जा सकता है।
सेमिनार में शूले अलसूर, शांतिनगर, चामराजपेट, हनुमंतनगर, जयनगर, वसंतनगर, सेवानगर, हेब्बाल, शिवाजीनगर, राजाजीनगर, श्रीरामपुरक, मागड़ी रोड, विजयनगर, मल्लेश्वरम, कमनहल्ली के अलावा दोड्डबालापुर, मैसूरु, पिल्लीपुरम, चेन्नई, पुणे, मालेगांव के युवकों ने भी भाग लिया।
शूले जैन युवा संघ के मंत्री अनिल कोठारी, कोषाध्यक्ष माणक लूणावत, उपाध्यक्ष निहाल कांकरिया, संदीप कोठारी, अजय गादिया, प्रदीप भंसाली ने सेमिनार को सफल बनाया। शूले युवा अध्यक्ष सुनील मरलेचा ने अतिथियों का आभार जताया।
Published on:
19 Nov 2018 05:21 pm
