
सूचना आयुक्त के 3 पदों के लिए 316 आवेदक
बेंगलूरु. राज्य मेें सूचना आयुक्त के तीन रिक्त पदों के लिए 316 लोगों ने आवेदन किए हैं। 11 सदस्यीय राज्य सूचना आयोग में फिलहाल मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा सूचना आयुक्त के भी दो पद रिक्त हैं।
तीनों पद के लिए आवेदकों में से अधिकांश पूर्व नौकरशाह हैं, जिनमें पूर्व मुख्य सचिव और पूर्व पुलिस महानिदेशक स्तर के पद पर रह चुके अधिकारी भी हैं।
प्रशासनिक व कार्मिक सुधार विभाग के सूत्रों का कहना है कि यह पहला मौका है जब इन पदों के लिए इतनी अधिक संख्या में आवेदन मिले हैं।
मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी की अध्यक्षता वाली चयन समिति की सोमवार को होने वाली बैठक में तीनों पदों पर नियुक्तियों के बारे में चर्चा की जाएगी। इस समिति में कुमारस्वामी के अलावा उपमुख्यमंत्री डॉ जी परमेश्वर, विधानसभा में विपक्ष के नेता बी एस येड्डियूरप्पा और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश भी सदस्य हैं।
नियमों के मुताबिक नियुक्ति से पहले विपक्ष के नेता और उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की राय ली जानी आवश्यक है।
मुख्य सूचना आयुक्त पद के लिए पूर्व नौकरशाहों में सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा है। इस पद की दौड़ में पूर्व मुख्य सचिव के. रत्नप्रभा के अलावा पूर्व आइएएस अधिकारी एम लक्ष्मीनारायण, पूर्व पुलिस महानिदेशक ओमप्रकाश के साथ ही मौजूदा सूचना आयुक्त एल कृष्णमूर्ति, लिंगराजू भी शामिल हैं।
ओमप्रकाश ने पिछले साल भी आवेदन किया था। जानकारों का कहना है कि वेतन-भत्तों और सुविधाओं के कारण सूचना आयुक्तों के पद के प्रति आकर्षण बना है।
सेवानिवृति के बाद प्रशासनिक व पुलिस अधिकारियों को यह एक बेहतर कॅरियर का विकल्प लगता है और इसके कारण पिछले कुछ वर्षों के दौरान आवेदनों की संख्या बढ़ी है।
मुख्य सूचना आयुक्त का पद इसी साल सितम्बर में सुचेतना स्वरुप की सेवानिवृति के कारण रिक्त हुआ है जबकि दो सूचना आयुक्तों का पद करीब साल भर से रिक्त पड़ा है।
फिलहाल आयोग में सिर्फ 8 सूचना आयुक्त ही कार्यरत हैं। स्वरुप को पिछले साल अगस्त में नियुक्त किया गया था। बताया जाता है कि इन नियुक्तिों को लेकर कुमारस्वामी ने कांग्रेस विधायक दल के नेता सिद्धरामय्या, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दिनेश गुंडुराव तथा जद-एस के राष्ट्रीय अध्यक्ष एच.डी.देवेगौडा के साथ भी बातचीत की है।
11 सदस्य होते हैं आयोग में
राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त के अलावा 10 अन्य सूचना आयुक्त भी होते हैं। रैंक के लिहाज से मुख्य सूचना आयुक्त उच्चतम न्यायालय के जज, चुनाव आयुक्त और मुख्य सचिव स्तर के होते हैं जिन्हें सेवा में रहते हुए क्र 1.25 लाख वेतन के अलावा अन्य भत्ते व सुविधाएं मिलती हैं। पांच साल तक काम करने के बाद मुख्य सूचना आयुक्त सेवानिवृति लाभ के भी हकदार होते हैं।
क्या है योग्यता
सूचना आयुक्त अथवा मुख्य सूचना आयुक्त पद के लिए पूर्व नौकरशाहों के साथ कुछ अन्य पेशे से जुड़े अनुभवी लोग आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए प्रशासनिक, सामाज सेवा, विज्ञान तकनीक और पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े 65 वर्ष से कम आयु के लोग आवेदन कर सकते हैं।
वेतन और सुविधाएं
मुख्य सूचना आयुक्त को करीब क्र2.50 लाख वेतन के अलावा मकान किराया भत्ता के तौर पर क्र40 हजार के साथ अन्य भत्ते व सुविधाएं भी मिलती हैं। आयुक्तों को भी ऐसी सुविधाएं मिलती हैं।
पूर्व नौकरशाहों का पुनर्वास केंद्र !
सूचना अधिकार कार्यकर्ता वाईजी मुरलीधरन ने कहा कि अच्छे वेतन-भत्ते के कारण आयोग सेवानिवृत अधिकारियों के लिए पुनर्वास केंद्र बनकर रह गया है। बेहतर होगा कि सर्वोच्च पद पर अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को मौका मिले।
लंबित मामलों में तीसरे स्थान पर
लंबित मामलों की संख्या के लिहाज से राज्य सूचना आयोग देश में तीसरे स्थान पर है। हाल ही में आई केंद्रीय सूचना आयोग की समीक्षा रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में करीब 33 हजार मामले लंबित थे और औसतन एक अपील के निस्तारण में 13 महीने का वक्त लगता है।
केंद्रीय आयोग के निर्देश पर 1 जनवरी 2016 से अक्टूबर 2017 तक के मामलों के विश£ेषण के आधार पर सतर्क नागरिक संगठन और सेंटर ऑफ इक्विटीज स्टडीज ने यह रिपोर्ट तैयार की थी।
कर्मचारियों की कमी
राज्य आयोग के सूत्रों का कहना है कि लंबित मामलों की संख्या बढऩे के पीछे कर्मचारियों की कमी एक बड़ी समस्या है। आयोग में अधिकांश कर्मचारी या तो ठेके पर कार्यरत हैं अथवा दूसरे विभागों से प्रतिनियुक्ति पर आए हैं। आयोग ने सरकार से कैडर और सेवा नियमों को मंजूरी देने की है ताकि वह अपने स्तर पर कर्मचारियों की नियुक्ति कर सके।
Updated on:
19 Nov 2018 04:41 pm
Published on:
19 Nov 2018 04:41 pm
