बैंगलोर

व्यक्ति को कभी इतराना नहीं चाहिए

उसका जीवन स्वाभाविक रूप से अच्छा ही होता है

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व्यक्ति को कभी इतराना नहीं चाहिए

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ, चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में शनिवार को उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि किसी भी विशेष व्यक्ति की विशेषता की अनुमोदना करनी चाहिए। दृष्टि पवित्र तभी बनती है जब दृष्टि में प्रेम हो, इसे सम्यक दृष्टि भी कहते हैं।

मुनि ने कहा कि संसार के मार्ग पर चलने के लिए ज्यादा पुरुषार्थ नहीं करना पड़ता, लेकिन धर्म के मार्ग पर चलने के लिए अपने जीवन की दिशा व सोच को बदलना पड़ता है। जिसके दिल में सच्ची मोहब्बत हो उसे ज्यादा कुछ करना नहीं पड़ता, उसका जीवन स्वाभाविक रूप से अच्छा ही होता है। उपकारों के उपकार को कृतघ्नता याद नहीं होने देती है। दुर्जन को भी कृतघ्न कहते हैं।

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कृतघ्नता से मनुष्यता अपमानित हो जाती है। इंसानियत यही पाठ पढ़ाती है कि भला करने वालों के साथ भला करना चाहिए। यह बहुत अच्छी बात है, क्योंकि इंसानियत यही है। इंसान से ऊपर उठकर धर्म यह भी है कि उपकार का बदला उपकार से देना सामान्यजन की बात है। बुराई का बदला भलाई से देना साधुता का धर्म है। वह एक इंसान सज्जन यानी संत है।

तीसरी श्रेणी उन लोगों की है जो भलाई का बदला बुराई से देते हैं। योग्यता मिलने के बाद व्यक्ति को कभी इतराना नहीं चाहिए। जीवन की कला सिखाने वाले माता-पिता को ऊंचाइयों पर पहुंचने के बाद भूल जाना बेहद चिंताजनक है।

प्रारंभ में उपाध्याय रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण किया। रमणीक मुनि ने ओंकार का सामूहिक उच्चारण कराया। रचित मुनि ने गीतिका सुनाई। पारस मुनि ने मांगलिक प्रदान की। महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि धर्म सभा में अम्बतूर, चेन्नई, दिल्ली, पुणे, घोडऩदी सहित शहर के विभिन्न उपनगरीय संघों से श्रद्धालु मौजूद रहे। संचालन सह मंत्री सुरेशचंद मूथा ने किया।

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महिलाओं, बच्चों ने खेला डांडिया
बेंगलूरु. क्षेत्रपाल नवरात्रि मित्र मंडल, मागड़ी रोड की ओर से मागड़ी मेट्रो स्टेशन के पास स्थित बापूजी स्कूल ग्राउंड में शनिवार को गरबा डांडिया हुआ। माता की आरती के बाद सजी-धजी महिलाओं एवं बच्चों ने डांडिया रास खेला। संयोजक बाबूसिंह नोरवा, अध्यक्ष दिलीप भंडारी, ललित प्रजापत व सदस्यों ने विजेताओं को पुरस्कृत किया।

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Published on:
14 Oct 2018 05:32 pm
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