बैंगलोर

बीबीएमपी सफाइकर्मियों का दर्द न जाने कोय

छह महीने से सफाइकर्मियों को नहीं मिला है वेतनन सुरक्षा उपकरण मिलते हैं न अन्य सुविधाएं

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Jun 30, 2018
bbmp
बीबीएमपी सफाइकर्मियों का दर्द न जाने कोय

प्रियदर्शन शर्मा

बेंगलूरु. स्वच्छ भारत अभियान के लिए एक ओर देश भर में हर वर्ष हजारों करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बेंगलूरु में जिन सफाइकर्मियों के कंधों पर बेंगलूरु को स्वच्छ रखने का भार है उन्हें पिछले करीब छह महीनों से वेतन भी नसीब नहीं है।

सफाइ कर्मियों ने पिछले महीने वेतन एवं अन्य लंबित सुविधाओं की मांग को लेकर बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) कार्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बावजूद बीबीएमपी की ओर से सफाइ कर्मियों को सिर्फ कोरा आश्वासान मिला। हर सुबह बेंगलूरु के गली-मोहल्लों में सफाई करने वाले हजारों सफाइकर्मी बीबीएमपी की इस बेरुखी से परेशान हैं और एक प्रकार से उनके सामने भूखे मरने की नौबत है।

बीबीएमपी में पिछले नौ वर्षों से सफाइकर्मी के रूप में कार्यरत वीरम्मा (बदला हुआ नाम) का कहना है कि हर कोई चाहता है कि बेंगलूरु साफ रहे लेकिन हमारे वेतन भुगतान को लेकर किसी को चिंता नहीं है। वेतन भुगतान की मांग को लेकर पिछले महीने जब हमने सफाई बहिष्कार किया तब बीबीएमपी की ओर से आश्वासन दिया गया कि शीघ्र ही सभी प्रकार के लंबित बकाया भुगतान कर दिया जाएगा लेकिन करीब दो पखवाड़े बीतने के बाद भी कुछ नहीं हुआ।

एक अन्य महिला सफाइकर्मी का कहना था कि हमारे साथ जानबूझकर अन्याय किया जा रहा है। राज्य सरकार से लेकर बीबीएमपी के मेयर, पार्षदों और तमाम अधिकारियों को पता है कि हमें वेतन नहीं मिल रहा है लेकिन वे इसके समाधान की कोई चर्चा नहीं करते हैं। नियमों के हिसाब से हमें काम करने के दौरान सुरक्षा उपकरण जैसे दस्ताने, मास्क आदि मिलने चाहिए लेकिन नौबत है कि कई बार झाड़ू भी समय पर नहीं मिलता। विविध प्रकार की गंदगी को उठाने के दौरान संक्रमण का खतरा बना रहता है लेकिन हमारे स्वास्थ्य चिंताओं से सब आंख मंूदें हैं।

अन्याय के विरुद्ध सभी से साथ देने की अपील
वीरम्मा कहती है कि हमारे लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना मुश्किल हो गया है। 'अन्न भाग्याÓ जैसी योजना से मिलने वाले नि:शुल्क चावल से किसी तरह सुबह शाम का खाना बन पाता है लेकिन अन्य प्रकार की दैनिक जरुरतों के लिए हर दिन एक-एक रुपए के लिए मोहताज होना पड़ता है।

एक अन्य सफाईकर्मी कहती है कि बीबीएमपी के पास अपनी योजना को क्रियान्वित करने के लिए फंड की कोई नहीं है लेकिन जब बात सफाइकर्मियों के वेतन भुगतान का आता है तब वे फंड की कमी और बायोमेट्रिक उपस्थिति जैसे कारण बताकर पल्ला झाड़ रहे हैं। वह बेंगलूरु के सभी नागरिकों से अपील करती हुई कहती है कि हम लोगों के साथ किए जा रहे अन्याय के विरुद्ध सब लोग साथ दें और हमें न्याय दिलाने में सहयोग करें।

Published on:
30 Jun 2018 08:47 pm