
बेंगलूरु. उप मुख्यमंत्री डॉ. जी. परमेस्वर ने कहा बेंगलूरु की बढ़ती आबादी के कारण कावेरी नदी से 30 टीएमसी पानी लाने पर विचार किया जा रहा है। उन्होंने गुरुवार को तुमकूर स्थित सिद्धार्थ मेडिकल कॉलेज मेंं नए एमआरवी और स्कैनिंग इकाई का उद्घाटन करने के बाद बताया कि बेंगलूरु के लिए कावेरी नदी से 18 टीएमसी पानी प्राप्त किया जा रहा है।
बेंगलूरु में कम से कम 8 टीएमसी पानी रिस कर बर्बाद हो जाता है। शहर में पानी लाने के लिए कितना खर्च होता है और जल कर से कितनी आमदनी हो रही है। इसका हिसाब किसी के पास नहीं है। बेंगलूरु में संपत्ति कर हर साल केवल 2300 करोड़ रुपए की आमदनी हो रही है। हर साल मूलभूत सुविधाओं के लिए 9,000 करोड़ रुपए का खर्च आ रहा है।
उन्होने कहा कि सरकार ने कचरा निस्तारण समस्या को हल करने के लिए बिजली उत्पादन को प्रमुखता दे रही है। कचरा निस्तारण समस्या के लिए सरकार ने 500 करोड़ रुपए जारी किए हैं। फिर भी यह समस्या हल नहीं हो रही है।
मंडूर, मावल्लीपुर, बिंगीगेरे, टेर्रा फार्म और अन्य डंपिंग यार्डों को बंद करने से कचरा निस्तारण समस्या हो गई है। सरकार ने सात नए डंपिंंग यार्ड को कन्नाहल्ली, सीगेहल्ली, दोड्डा बिदरकल्लू , लिंगा धीरनाहल्ली, सुब्बारायानापाल्या, चिक नागमंगला और कूडलू में निर्मित किया है। यहां बिजली, ऊर्वरक और गैस का उत्पादन किया जाता है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बेंगलूरु के पुराने और नए केन्द्रीय वाणिज्य क्षेत्रों के प्रमुख सड़कों को टेंडर श्यूर के तर्ज पर विकास करने के लिए अनुदान जारी किया है। सड़क नेटवर्क मेंं वैकल्पिक मागों को उपलब्ध कराने के लिए 1500 किलोमीटर तक लंबे सड़कों का विकास किया जाएगा।
पारम्परिक महत्व रखने वाले रसल मार्केट, जॉनसन मार्केट और के.आर.मार्केट के आधुनिकीकरण के लिए निविदाओं को आमंत्रित किया है। वाइट फील्ड और पीनिया औद्योगिक क्षेत्र समेत प्रमुख आईटी-बीटी क्षेत्रों का समग्र विकास की जिम्मेदारी निजी कंपनियों को देने के लिए करार होगा।