
कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार(फोटो-ANI)
Karnataka Gutkha and Tobacco Ban: कर्नाटक सरकार ने जन स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए राज्य में एक वर्ष के लिए गुटखा, पान मसाला और तंबाकू या निकाटीन युक्त अन्य उत्पादों के निर्माण, भंडारण, वितरण, परिवहन और बिक्री पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी। ये प्रतिबंध अधिसूचना जारी होने की तारीख (10 अगस्त) से एक वर्ष तक प्रभावी रहेगा।
हालांकि व्यक्तिगत सेवन प्रतिबंध में शामिल नहीं है। विभाग ने यह आदेश खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 और खाद्य सुरक्षा और मानक (बिक्री पर निषेध और प्रतिबंध) विनियम, 2011 के तहत मिली शक्तियों के तहत लागू किया है। सरकार का कहना है कि इस कदम का मकसद राज्य में तंबाकू की लत पर अंकुश लगाना और स्वस्थ एवं नशा-मुक्त कर्नाटक के निर्माण की दिशा में काम करना है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के मुताबिक देश में 15 वर्ष से अधिक उम्र के करीब 26.7 करोड़ लोग किसी न किसी रूप में तंबाकू का इस्तेमाल करते हैं। इसमें खैनी, गुटखा, तंबाकू, पान मसाला और जर्दा है।
कर्नाटक सरकार ने खाद्य सुरक्षा अधिकारियों के नेतृत्व में विशेष निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान भी शुरू किए हैं। अधिकारियों की टीमें प्रतिबंधित तंबाकू और निकोटिन उत्पादों की बिक्री और वितरण पर नजर रखेंगी तथा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
भारत में तंबाकू जनित बीमारियों से हर वर्ष करीब 13.5 लाख मौतें होती हैं। 2022 में भारत में 83 हजार नए ओरल कैंसर के मामले ऐसे थे, जो धुआं रहित तंबाकू और सुपारी का सेवन करते थे।
एफएसएसएआइ रेगुलेशन 2.3.4 के तहत किसी खाद्य पदार्थ में तंबाकू या निकोटिन को इंग्रीडेंट्रस के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। इसी प्रावधान के चलते गुटखे पर कानूनी रोक लगी। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अध्ययन में पाया गया कि प्रतिबंध के बाई कई उपभोक्ता तंबाकू और दूसरे घटक अलग-अलग खरीदकर गुटखा तैयार करने लगे। यानी विक्रताओं ने प्रतिबंध का भी तोड़ निकाल लिया।
उल्लंघन पर क्या? अधिसूचना में एफएसएस एक्ट की धाराओं में किसी दंड का प्रावधान नहीं है। हालांकि उत्पाद जब्त, जांच और पूछताछ आदि के बाद कानूनी कार्रवाई संभव है।
इन देशों में पूरी तरह बैन : ऑस्ट्रेलिया, भूटान, सिंगापुर, श्रीलंका में निर्माण, बिक्री और आयात पर पूरी तरह रोक, जबकि थाईलैंड में आयात और बिक्री पर रोक है। हालांकि निकोटिन के अन्य स्वरूप के इस्तेमाल की जानकारी नहीं है।
Updated on:
13 Aug 2026 07:33 am
Published on:
13 Aug 2026 07:33 am
