
सीएम विजय (Photo - ANI)
Indus Script Decipherment Prize: करीब 4,000 साल पुरानी सिंधु लिपि आज भी इतिहास की सबसे बड़ी अनसुलझी पहेलियों में शामिल है। 1924 में सिंधु सभ्यता की खोज की घोषणा के बाद से भाषाविद्, पुरातत्वविद् और कंप्यूटर वैज्ञानिक इसके चिह्नों का अर्थ तलाश रहे हैं। जनवरी 2025 में तमिलनाडु सरकार ने लिपि को समझने वाले को 10 लाख डॉलर (करीब 9.54 करोड़ रुपए) के पुरस्कार की घोषणा की तो यह दौड़ तेज हो गई लेकिन अभी तक कोई इसे डिकोड नहीं कर पाया।
तमिलनाडु पुरातत्व विभाग के एक अध्ययन में सिंधु सभ्यता के प्रतीकों और राज्य के पुरातात्विक स्थलों से मिले भित्तिचित्रों में समानताएं बताई गई हैं। इन निष्कर्षों ने सिंधु सभ्यता की भाषाई जड़ों को लेकर द्रविड़ और इंडो-आर्यन परिकल्पनाओं की पुरानी बहस को फिर चर्चा में ला दिया।
कोई इसे प्राचीन द्रविड़ भाषाओं से जोड़ता है, तो कोई इसके चिह्नों में खगोलीय संकेत तलाशता है। कुछ दावे तो इन्हें 'चेतना की बदली हुई अवस्थाओं' या 'रहस्यमय ज्ञान' से भी जोड़ते हैं। एक दावेदार ने तो 99.1 प्रतिशत सटीकता वाले एआइ एल्गोरिदम से लिपि को डिकोड करने का दावा तक किया, जो प्रमाणित नहीं हुआ।
इस पहेली को सुलझाने में कई दशकों से दुनिया के विशेषज्ञ जुटे हैं। फिनलैंड के अस्को पारपोला और कनाडा के ब्रायन वेल्स जैसे शिलालेख विशेषज्ञों ने सिंधु चिह्नों के वर्गीकरण और उनकी संरचना पर लंबा काम किया है। अब कंप्यूटर वैज्ञानिक और एआइ शोधकर्ता भी चिह्नों के पैटर्न, क्रम और संबंधों से संभावित भाषाई संरचना तलाश रहे हैं।
Updated on:
13 Aug 2026 07:24 am
Published on:
13 Aug 2026 06:58 am
