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Cyber Fraud India 2026: 3,718 फर्जी ऐप ब्लॉक! साइबर ठगों पर सरकार का बड़ा वार, बचाए गए 11,158 करोड़

Blocked SIM Cards Cyber Fraud: फर्जी लोन ऐप और डिजिटल ठगी के खिलाफ सरकार ने अब बड़ा अभियान छेड़ दिया है। हजारों ऐप पर कार्रवाई के साथ करोड़ों रुपये की संदिग्ध रकम को ठगों तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की गई है।
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भारत

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Manoj Vashisth

Aug 13, 2026

Cyber Fraud India 2026

Cyber Fraud India 2026 :साइबर ठगी पर बड़ा शिकंजा, म्यूल अकाउंट्स के जरिए 25,698 करोड़ का लेनदेन रोका (फोटो सोर्स : AI@chatgpt)

Mule Account Fraud: एक क्लिक, एक ओटीपी और कुछ ही सेकंड में बैंक खाते से पैसा गायब… साइबर ठगों के इस जाल को तोड़ने के लिए सरकार ने ऐप से लेकर सिम, मोबाइल और बैंक खातों पर कार्रवाई शुरू की है। गृह मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि 30 जून 2026 तक देश में फर्जी लोन ऐप सहित 3,718 मोबाइल ऐप ब्लॉक किए जा चुके हैं और 11,158 करोड़ रुपए साइबर ठगों से बचाए गए। यह कार्रवाई इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों, बैंकों, वित्तीय संस्थानों और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म के साथ मिलकर की है।

तेजी से बढ़ते डिजिटल पेमेंट, इंटरनेट बैंकिंग और ऑनलाइन सेवाओं के बीच साइबर अपराधी नए-नए तरीकों का इस्तेमाल कर धोखाधड़ी कर रहे हैं। ऐसे में सरकार की मौजूदा रणनीति सिर्फ फर्जी ऐप को बंद करने तक सीमित नहीं है। साइबर ठगी होने पर 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज की जा सकती है। गैरकानूनी ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ तेजी से कार्रवाई करने के लिए सहयोग पोर्टल भी शुरू किया गया है।

Cyber Fraud India 2026: हजारों ऐप पर लगा ब्रेक, ठगों के नेटवर्क पर भी नजर

सरकार की कार्रवाई का दायरा सिर्फ मोबाइल ऐप बंद करने तक सीमित नहीं है। साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क को कमजोर करने के लिए अलग-अलग सरकारी एजेंसियों के साथ बैंक, वित्तीय संस्थान और टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म भी मिलकर काम कर रहे हैं। इस अभियान में इंडियन साइबरक्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर यानी I4C की अहम भूमिका है।

फर्जी लोन ऐप लंबे समय से साइबर अपराधियों का बड़ा हथियार रहे हैं। ऐसे ऐप आसान और तुरंत कर्ज देने का दावा करके लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। इसके बाद कई मामलों में अत्यधिक ब्याज, धमकी, निजी डेटा के दुरुपयोग और जबरन वसूली जैसी शिकायतें सामने आती रही हैं। यही वजह है कि संदिग्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म की पहचान कर उन्हें ब्लॉक करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

Cyber Fraud India 2026: 32.08 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट की पहचान

सरकारी कार्रवाई में 32.08 लाख लेयर-1 म्यूल अकाउंट की पहचान की गई है। लेयर-1 खातों को ऐसे शुरुआती खाते माना जाता है, जहां साइबर ठगी से जुड़ी रकम सबसे पहले पहुंच सकती है।

इन खातों की पहचान साइबर फ्रॉड के पैसों की आवाजाही रोकने की दिशा में अहम कदम है। जैसे ही किसी संदिग्ध लेनदेन की जानकारी मिलती है, संबंधित बैंकिंग नेटवर्क में आगे होने वाली रकम की आवाजाही पर रोक लगाने की कोशिश की जाती है।

25,698 करोड़ रुपये के लेनदेन पर लगी रोक

सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में से एक है म्यूल अकाउंट्स के जरिए होने वाले 25,698 करोड़ रुपये के लेनदेन को रोका जाना। यह रकम बताती है कि साइबर अपराध का नेटवर्क कितने बड़े वित्तीय पैमाने पर काम कर सकता है।

पैसे को शुरुआती स्तर पर ही रोकना जांच एजेंसियों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि एक बार रकम कई खातों और डिजिटल वॉलेट के जरिए अलग-अलग जगह पहुंच जाए तो उसकी रिकवरी और ट्रैकिंग कहीं ज्यादा मुश्किल हो जाती है।

15.75 लाख से ज्यादा मोबाइल सिम ब्लॉक

साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई सिर्फ बैंक खातों तक सीमित नहीं रही। संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े 15.75 लाख से अधिक मोबाइल सिम कार्ड को भी ब्लॉक किया गया है।

मोबाइल नंबर साइबर ठगी के नेटवर्क में बेहद अहम कड़ी होते हैं। इन्हीं के जरिए फर्जी कॉल, OTP हासिल करने की कोशिश, लिंक भेजने, सोशल इंजीनियरिंग और दूसरे डिजिटल फ्रॉड किए जाते हैं। संदिग्ध सिम पर कार्रवाई का सीधा असर ऐसे नेटवर्क की संचार क्षमता पर पड़ता है।

5.77 लाख IMEI नंबर भी ब्लॉक

सिम के साथ-साथ 5.77 लाख IMEI नंबर को ब्लॉक किया गया। IMEI किसी मोबाइल डिवाइस की विशिष्ट पहचान होती है। इसका इस्तेमाल संदिग्ध मोबाइल उपकरणों की पहचान और उन्हें नेटवर्क पर दोबारा इस्तेमाल किए जाने से रोकने में मदद करता है।

सिर्फ सिम बंद करना कई बार पर्याप्त नहीं होता, क्योंकि अपराधी नया सिम डालकर उसी फोन से गतिविधियां शुरू कर सकते हैं। इसलिए सिम और डिवाइस दोनों स्तरों पर कार्रवाई साइबर अपराध के खिलाफ रणनीति को ज्यादा प्रभावी बनाती है।