बैंगलोर

स्वभाव बदलने से होगा वास्तु दोष निवारण

उन्होंने कहा कि आत्मा ही करता है और आत्मा ही भोगता है

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स्वभाव बदलने से होगा वास्तु दोष निवारण

उन्होंने कहा कि मकान चाहे वास्तु के अनुसार ही क्यों न हो, लेकिन जिस घर में अपनों के प्रति आदर और समर्पण भाव नहीं है उस घर में शांति कैसे आएगी?

मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में सिटी स्थानक में डॉ समकित मुनि ने 'घर के वास्तु दोषÓ विषय पर कहा कि वास्तु दोष निवारण के लिए व्यक्ति को अपने स्वभाव को बदलना चाहिए। घर का वास्तु जहां 5 से 10 प्रतिशत प्रतिफल देता है वहीं 90 से 95 प्रतिशत वास्तु फल तो घर वालों के तालुकात पर निर्भर रहते हैं। उन्होंने कहा कि मकान चाहे वास्तु के अनुसार ही क्यों न हो, लेकिन जिस घर में अपनों के प्रति आदर और समर्पण भाव नहीं है उस घर में शांति कैसे आएगी? फिर हम अपने कर्मों को या भगवान को दोषी ठहराने से क्या मतलब, जब हम अपने आप ही दोषी हैं। आत्मा ही करता है और आत्मा ही भोगता है।

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भवांत मुनि ने तपस्वियों के प्रति मंगलकामना व्यक्त की। अष्टमी को सामूहिक एकासना दिवस मनाया जाएगा। जयवंत मुनि ने गीतिका प्रस्तुत की। अध्यक्ष कैलाशचंद बोहरा, मंत्री सुशील नंदावत ने भी विचार व्यक्त किए। सभा में ऊटी से आए विजयराज कोठारी का अभिनन्दन किया गया।


मत्स्य युगल की साधना से बढ़ता है प्रेम
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ सिद्धार्थनगर सीआईटीबी चोल्ट्री में श्रुत मुनि ने अष्ट मंगल में दूसरा चिह्न मत्स्य युगल का भावार्थ बताते हुए कहा कि मत्स्य युगल अग्निकोण में स्थापित करना मंगलमय है। अग्निकोण नीचा, कटा हुआ या बढ़ा हुआ नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अग्नि कोण दक्षिण दिशा में होने से शुक्र ग्रह का प्रभाव होता है।

शुक्र ग्रह के स्वामी सुविधिनाथ भगवान हैं। अग्निकोण में सुविधिनाथ भगवान का चित्र लगाने से वास्तु दोषों का अंत होता है। मत्स्य युगल की साधना से प्रेम, स्नेह, वात्सल्य, श्रद्धा व मैत्री को बढ़ाता मिलता है। मुनि ने तपस्वियों और केजीएफ से महिला मंडल संघ व अन्य क्षेत्रों से आए श्रावकों का धन्यवाद किया। बुधवार से एकासन के तेले की तपस्या होगी।

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Published on:
01 Aug 2018 07:41 pm
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