
शाश्वत सुख पाना है तो धर्म की शरण में जाएं
बेंगलूरु. राजाजीनगर में साध्वी संयमलता ने कहा कि सुख के दिनों में मनोरंजन नहीं मनोमंथन करें। संसार के प्राणी सुख को भोगते हैं, देवी देवता महासुख को एवं सिद्ध भगवान परम सुख को प्राप्त करते हंैं। उन्होंने कहा कि शाश्वत सुख को पाने के लिए हमें धर्म की शरण में आना होगा। सुख के समय में धर्म नहीं करोगे तो पाप का मीटर निरंतर चलता रहेगा, जिसे भोगने में असंख्य बरसों का समय भी कम पड़ता है। साध्वी ने कहा कि पाप से दु:ख मिलता है और धर्म से सुख मिलता है। साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि हमें राजनीति में धर्मनीति को लाना है, धर्मनीति में राजनीति नहीं लाना चाहिए। बुधवार से एक माह के तिलए तिक्खुतों के पाठ से वंदना का मास खमण का आयोजन होगा। दोपहर में महिला शिविर हुआ। रेखा पोखरणा ने तीन उपवास के प्रत्याख्यान लिए।
धर्म का मूल विनय
बेंगलूरु. विजयनगर में साध्वी मणिप्रभा ने कहा कि भगवान महावीर स्वामी ने उत्तराध्ययन सूत्र में प्रथम अध्ययन में फरमाया है कि आप अपने जीवन में विनय को स्थान दें, विनय धर्म का मूल है। जो व्यक्ति अपने जीवन में विनय को स्थान देता है वह विद्वान बन जाता है। विनय को प्राप्त करके ही गौतम स्वामी भी लब्धिधारी बन गए। हीरा जो जड़ा जाता है वह भी सोने के अंदर ही जड़ा जाता है, लोहे के अंदर नहीं, क्योंकि सोना कोमल होता है, मुलायम होता है। व्यक्ति भी अपने जीवन में विनय को धारण करता है तो वह भी ज्ञानवान बनता है।
साध्वी आस्था ने कहा कि समय अमूल्य धन है। मानव समय का सही सदुपयोग करता है तो भी अपने जीवन का कल्याण करता है। मनुष्य भव महत्व सुंदर स्वस्थ शरीर मिलने तथा भोग उपभोग पाने से नहीं है। धनवान राजा, अधिकारी, सम्राट आदि बन जाने से मनुष्य जन्म सफल नहीं होता, यदि ऐसा होता तो देवता मनुष्य से कहीं आगे होते। देवता देव भांति से ही अपने जीवन को सफल बना लेते। मनुष्य भव की सफलता उस धर्म आराधना से है, जो देव पर्याय में रहकर नहीं कर सकता।

Published on:
01 Aug 2018 06:57 pm
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