कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए राजनीति करने के बजाय वे लोगों की समस्याएं हल करने की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हैं
बेंगलूरु. कर्नाटक में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2018 -19 के लिए राज्य का पूर्ण बजट जुलाई के पहले या दूसरे सप्ताह में पेश किया जाएगा। कुमारस्वामी ने शनिवार को जेपीनगर स्थित अपने निवास पर संवाददाताओं से कहा कि मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने के लिए राजनीति करने के बजाय वे लोगों की समस्याएं हल करने की रूपरेखा तैयार करने में जुटे हैं।
राजनीति करने के लिए दूसरे लोग हैं। गठबंधन सरकार अगले पांच साल तक रहेगी। फिलहाल कुछ समस्याएं हैं जिन्हें एक सप्ताह में दूर कर लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मैंने किसानों का ऋण माफ नहीं करने की बात कभी नहीं कही पर क्या येड्डियूरप्पा ने सत्ता में रहते कभी किसानों का ऋण माफ किया था? वे पुरानी बातों को याद करें कि ऋण माफ करने के बारे में उन्होंने क्या कहा था।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार किसानों को कर्ज से मुक्ति दिलाएगी और उनको दोबारा कर्जदार नहीं बनने देने के लिए समुचित कदम भी उठाएगी। शुक्रवार को इजरायल के विशेषज्ञों के साथ बैठक की गई थी।
किसानों का ऋण माफ करने के मसले पर भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष लक्ष्मण सावदी की टिप्पणी पर कुमारस्वामी ने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में सवदी को अथणी के लोगों ने हरा दिया था। उनको गन्ना उत्पादक किसानों की समस्याएं दूर करने की तरफ ध्यान देना चाहिए। अगले दस पन्द्रहदिनों में किसानों का कर्ज माफ करने की रूपरेखा तैयार कर ली जाएगी।
सभी को खुश करने की जुगत
वहीँ, नाराज नेताओं को मनाने में जुटी कांग्रेस अपने कोटे के मंत्री पदों के बंटवारे और सभी को खुश करने के लिए नए-नए सूत्र तलाशने में जुटी है। पहले हर छमाही मंत्रियों के कामकाज की समीक्षा करने और दो साल बाद मंत्रियों को बदलने का सूत्र पार्टी नेताओं ने आलाकमान को सुझाया था। दिनेश और प्रदेश प्रभारी महासचिव के. सी. वेणुगोपाल ने पार्टी आलाकमानक को सुझाया था कि सिर्फ 22 पद होने के कारण सभी नेताओं को मौका देना संभव नहीं है। इसलिए चक्रानुक्रम में मंत्री बदले जाएं।
दोनों नेताओं का सुझाव था कि 2+3 वर्ष का सूत्र अपनाया जाए यानी पहले चरण में मंत्री बने नेताओं में से कुछ को दो साल बाद हटाकर नए लोगों को मंत्री बनाया जाए और वे बाकी कार्यकाल के दौरान पद पर रहें। अब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने इस सूत्र को नया विस्तार दिया है। परमेश्वर का सुझाव है कि 2+2+1 वर्ष का सूत्र अपनाया जाए। अभी मंत्री बने नेताओं में से कुछ को दो साल बाद हटाया जाए और नए नेताओं को मौका मिले। दो साल बाद फिर यही प्रक्रिया अपनाई जाए और उसके बाद मंत्री बने नेता सालभर पद पर रहें ताकि ज्यादा से ज्यादा नेताओं को सत्ता का सुख मिल सके।