समस्या: असंतोष का भय, लोस चुनाव तक टालें या फिर कुछ पद रिक्त रखें
बेंगलूरु. मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने अगले सप्ताह चार महीने पुराने अपने मंत्रिमंडल का दूसरा चिरप्रतीक्षित विस्तार करने की घोषणा कर गठबंधन के सहयोगी कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ा दी है। पार्टी में अंतर्कलह, खेमेबंदी और नेताओं के असंतोष की समस्या से जूझ रही कांग्रेस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर असमंजस की स्थिति में है। असंतुष्ट गतिविधियों से निजात पाने के लिए ही अगस्त के अंत में हुई गठबंधन समन्वय समिति की पिछल बैठक में मंत्रिमंडल का विस्तार अगस्त के तीसरे सप्ताह में करने का निर्णय लिया गया था लेकिन कांग्रेस में जारकीहोली बंधुओं के बागवती तेवर और विधान परिषद उपचुनाव के कारण इसे 3 अक्टूबर तक टाल दिया गया था। कुमारस्वामी ने इस बार के विस्तार में मंत्रिमंडल के सभी रिक्त 7 पद भरे जाने की बात कही है। इनमें से छह पद कांग्रेस के कोटे के हैं और यही कारण है कि कांग्रेस परेशान है।
कांग्रेस नेताओं में अभी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर मतभेद हैं। नेताओं के एक खेमे का कहना है कि अभी विस्तार किए जाने से वंचित नेताओं में असंतोष उभरेगा और नाराज विधायक और नेता अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पार्टी उम्मीदवारों के खिलाफ काम कर सकते हैं। इसलिए मंत्रिमंडल विस्तार और निगम-मंडलों में नियुक्तियों को अप्रेल-मई तक टाल दिया जाना चाहिए। ऐसे नेता मंत्री रमेश जारकीहोली और उनके भाई सतीश जारकीहोली के पिछले दिनों अपनाए बगावती तेवर का हवाला दे रहे हैं। जारकीहोली बंधुओं की मांगों में अपने समर्थक विधायकों के लिए मंत्री पद की मांग भी शामिल थी।
कांग्रेस के दूसरे खेमे के नेताओं का कहना है कि सभी पद एक साथ भरने के बजाय कुछ पद पदों को भर दिया जाए और बाकी पदों को रिक्त रखा जाए ताकि मंत्री बन पाने से वंचित नेताओं को अगले विस्तार में मौका देने का भरोसा दिया जा सके। कांग्रेस सूत्रों का कहना है आलाकमान को फिलहाल सिर्फ तीन पदों को भरने पर विचार कर रहा है। पार्टी कुछ नेताओं का सुझाव है कि फिलहाल मंत्रिमंडल विस्तार करने के बजाय सिर्फ निगम-मंडलों में नियुक्तियों की प्रक्रिया पूरी की जाए और लोकसभा चुनाव के बाद नए मंत्री बनाए जाएं। कांग्रेस के लिए दूसरी बड़ी चुनौती मंत्रिमंडल विस्तार में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों के बीच संतुलन बनाने की है। कांग्रेस पर इस बार उत्तर कर्नाटक और लिंगायत समुदाय के नेताओं को ज्यादा प्रतिनिधित्व देने का दबाव है तो दलित और अल्पसंख्यक समुदाय का भी दबाव है। पार्टी सूत्रों का कहना है कि आलाकमान ने अभी विस्तार और संभावित मंत्रियों के नामों को हरी झंडी नहीं दी है।
सप्ताहांत में कुमारस्वामी और राहुल की संभावित मुलाकत के दौरान इस पर अंतिम मुहर लग सकती है। प्रदेश कांग्रेस के नेता भी शनिवार अथवा रविवार को राहुल से मुलाकात करेंगे और इस दौरान मंत्रिमंडल विस्तार व संभावित मंत्रियों के नामों पर चर्चा होगी। पार्टी के प्रदेश नेता संभावित मंत्रियों और निगम-मंडलों में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष आदि के तौर पर नियुक्ति किए जाने वाले नेताओं की संभावित सूची तैयार कर रहे हैं। समन्वय समिति की बैठक मेें 30 निगम-मंडलों में नियुक्तियों पर सहमति बनी थी और दोनों दलों के बीच सत्ता बंटवारे के समझौते के मुताबिक कांग्रेस के कोटे में 20 और जद-एस के कोटे में 10 निगम-मंडल अध्यक्षों के पद होंगे।