राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि तकनीकी शिक्षा शोध, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है तथा स्वदेशी तकनीकी समाधानों के माध्यम से स्थानीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करती है।वे सोमवार को बेलगावी में आयोजित विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीटीयू) के 25वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर […]
राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि तकनीकी शिक्षा शोध, नवाचार और सतत विकास को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाती है तथा स्वदेशी तकनीकी समाधानों के माध्यम से स्थानीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान करती है।वे सोमवार को बेलगावी में आयोजित विश्वेश्वरैया प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (वीटीयू) के 25वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता करते हुए संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा ने मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे प्रमुख राष्ट्रीय अभियानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। तकनीकी रूप से सशक्त समाज वैश्विक स्तर पर सफलतापूर्वक प्रतिस्पर्धा कर सकता है। इसलिए तकनीकी शिक्षा को गुणवत्ता-आधारित, समावेशी और नवाचार-उन्मुख बनाना आवश्यक है। अमृतकाल का उल्लेख करते हुए राज्यपाल गहलोत ने कहा कि विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इंजीनियरों, वैज्ञानिकों और तकनीकी पेशेवरों को समाधान-उन्मुख सोच अपनानी होगी।
स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़ें। सच्ची सफलता केवल बौद्धिक क्षमता से नहीं, बल्कि चरित्र, ईमानदारी और करुणा से बनती है। भारत रत्न सर एम. विश्वेश्वरैया के योगदान को याद करते हुए राज्यपाल ने कहा कि उनका जीवन तकनीकी उत्कृष्टता, अनुशासन और राष्ट्र सेवा का उत्कृष्ट उदाहरण है। तकनीकी कौशल तभी सार्थक है जब वह समाज के कल्याण से जुड़ा हो। उन्होंने विद्यार्थियों से इन आदर्शों को अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि रियर एडमिरल विक्रम मेनन, कुलपति प्रो. एस. विद्याशंकर सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।