
बेंगलूरु. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर उपजे असंतोष को दूर करने के लिए कांग्रेस अपने कोटे के बाकी छह पदों को भी जल्द ही भरने की तैयारी कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि इससे पार्टी में असंतुष्टों की संख्या घटेगी। साथ ही पार्टी ने नाराज विधायकों को भविष्य में मंत्री पद मिलने की संभावना दिखाते हुए यह भी कहा है कि दो साल बाद मंत्रियों को सरकार में प्रदर्शन के आधार पर बदला जाएगा।
लोकसभा में पार्टी के नेता मल्लिकार्जुन खरगे और पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने रविवार को कहा कि वे इस मसले पर पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से बात करेंगे। इस बीच, कांग्रेस और जद-एस गठबंधन समन्वय व निगरानी समिति की पहली बैठक १४ जून होगी। १ जून को दोनों दलों ने विभागों के बंटवारे के साथ ही समिति के गठन की घोषणा की थी। सिद्धरामय्या समिति के अध्यक्ष हैं जबकि जद-एस के दानिश अली संयोजक। समिति में मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी और उपमुख्यमंत्री डॉ जी परमेश्वर भी सदस्य हैं।
लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने रविवार को कहा कि वे पार्टी में मंत्री पदों को लेकर चल रहे असंतोष को दूर करने के लिए पार्टी आलाकमान से बात करेंगे। खरगे ने कहा कि अगर दिल्ली में मुझे राहुल से मुलाकात के लिए समय मिलता है तो मैं उनसे रिक्त पदों को तत्काल भरने के लिए बात करुंगा। खरगे ने अगले कुछ दिनों में सबकुछ सामान्य हो जाने की उम्मीद जताते हुए कहा कि आलाकमान पार्टी के असंतुष्ट नेताओं से बात करेगा और उनकी समस्याओं को दूर करेगा। प्रदेश प्रभारी के सी वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद भी नाराज नेताओं से बातचीत कर रहे हैं।
खरगे ने कहा कि मंत्री पद पाने से वंचित रहे सभी वरिष्ठ विधायक पार्टी के प्रति निष्ठावान हैं लिहाजा वे किसी भी हाल में पार्टी को कमजोर करने या गठबंधन सरकार को अस्थिर करने का कोई प्रयास नहीं करेंगे। ये लोग पार्टी को मजबूत करने वाले नेता हैं। लिहाजा पार्टी में उभरे मतभेदों व असंतोष के कारण सरकार के अस्तित्व तथा पार्टी के संगठन पर कोई प्रतिकूल असर नहीं पड़ेगा।
पार्टी में असंतोष दूर करने के लिए चक्रानुमक्रम में मंत्री बनाने के सूत्र के बारे में पूछे जाने पर खरगे ने कहा कि इस बारे में उन्हें मीडिया की खबरों से पता चला है। यह पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष की सोच है। जो भी हो, पार्टी के हित में जो भी निर्णय किया जाता है वह अच्छा ही है। कांग्रेस आलाकमान राज्य के घटनाक्रम पर कड़ी नजर रखे हुए हैं।
खरगे ने उम्मीद जताई कि इस संबंध में समुचित निर्णय किया जाएगा ताकि सब कुछ शांत हो जाए। आलाकमान का फैसला ही अंतिम होगा और उसे सभी मानेंगे। मंत्रिमंडल के विस्तार व विभागों के बंटवारे को लेकर नारजगी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि हम इस पर चिंतन कर रहे हैं कि पार्टी अपने बलबूते पर सत्ता में क्यों नहीं आई। अगर पार्टी के पास पूर्ण बहुमत होता तो ऐसी स्थिति नहीं होती। यह गठबंधन सरकार है लिहाजा लेन-देन की नीति अपनानी पड़ती है।
जल्द होगा अगला विस्तार : परमेश्वर
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष व उपमुख्यमंत्री जी. परमेश्वर ने कहा कि मंत्रिमंडल के छह रिक्त पदों के बारे में पूछे जाने पर कहा कि इसे भरने के बारे में आलाकमान अंतिम फैसला लेगा।
परमेश्वर ने कहा कि अगला मंत्रिमंडल जल्द होगा और जिन नेताओं को इसमें मौका नहीं मिलेगा उन्हें निगम-बोर्डों में होने वाली नियुक्ति में मौका मिलेगा। परमेश्वर ने कहा कि पार्टी विधायकों के एक वर्ग में जो मतभेद हैं उसे जल्द दूर कर लिया जाएगा। परमेश्वर ने कहा कि हमारा मकसद सरकार को बिना किसी बाधा के चलाना है ताकि गठबंधन सरकार पांच साल तक चले। उधर, पार्टी में मतभेद के साथ ही विधायकों के भी कई गुट बन गए हैं।
असंतुष्ट विधायकों के एकजुट होने की कोशिश के साथ ही उनके विरोधी खेमे के विधायकों ने भी एकजुट होने की कोशिश शुरु कर दी है। सोमवार को दोनों ही खेमों के विधायकों ने समानांतर बैठक बुलाई है जिसमें वे आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। दूसरी तरफ पार्टी के नए विधायकों ने भी अपना तटस्थ गुट बना लिया है।
राहुल से मिलेंगे एचके पाटिल
उधर मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज चल रहे पूर्व मंत्री एच के पाटिल ने कहा कि वे अपने समर्थकों और असंतुष्ट विधायकों की राय से कांग्रेस आलाकमान को अवगत कराएंगे। पाटिल ने कहा कि अभी जो हालात हैं उसमें कोई खुश कैसे रह सकता है। पाटिल ने कहा कि वे पार्टी के समर्पित नेता हैं लेकिन अभी भावनाओं से पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को भेंट कर अवगत कराएंगे।
पाटिल से मिले भाजपा विधायक
एम बी पाटिल ने शनिवार को अपने आवास पर रायचूर से भाजपा के विधायक डॉ शिवराज पाटिल से मुलाकात की जिससे राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का नया दौर शुरु हो गया। हालांकि, बाद में शिवराज ने कहा कि यह कोई राजनीतिक मुलाकात नहीं थी। यह पुराने दोस्तों की मुलाकात थी। उन्होंने कहा कि एम बी पाटिल से मेरी मुलाकात का कोई राजनीतिक मतलब नहीं है। राजनीतिक मसलों पर उनसे चर्चा के लिए मेरा कद काफी छोटा है। यह सिर्फ मित्रवत मुलाकात थी जिसमें राजनीतिक मुद्दे नहीं थे।