बैंगलोर

हवाई बोलियों में उलझी नम्मा मेट्रो

बोलीदाताओं ने 610 करोड़ रुपए प्रति किमी की मांग की है

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Feb 13, 2018
Do or not do, that is the Questions: Namma Metro

बेंगलूरु. नम्मा मेट्रो के दूसरे चरण में डेयरी सर्किल से नागवारा तक भूमिगम खंड को चार हिस्सों में बांटकर जल्दी पूरा करने के लिए अलग-अलग ठेकेदार तलाशने का दांव बेंगलूरु मेट्रो रेल निगम को उल्टा पड़ गया है। चारों हिस्सों के लिए जो बोली लगी है वह निगम के प्राक्कलित लागत से 70 फीसदी तक ज्यादा है। रीच-6 नाम का यह खंड करीब 14 किलोमीटर का है। यह खंड नम्मा मेट्रो को बन्नेरघट्टा रोड से देवनहल्ली स्थित हवाई अड्डे को जोडऩे के महत्वपूर्ण योजना का हिस्सा है। हवाई अड्डा मार्ग पर यातायात का ज्यादा दबाव होने के कारण मेट्रो रेल निगम पर इस खंड को जल्द से जल्द पूरा करने का भी दबाव है।
गोट्टिगेरे से नागवारा तक 13.7 किलोमीटर लंबे भूमिगत खंड के लिए बोलियां लग चुकी हैं और कुछ दिनों में निर्माण कंपनी का चयन हो जाएगा। बेंगलूरु मेट्रो रेल निगम ने अगले सप्ताह तक छंटनी की प्रक्रिया होने की बात कही है। निगम के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी यूए वसंत राव ने बताया कि वित्तीय बोलियां खोली गई हैं, मगर अभी इस संबंध में अधिक जानकारी देना उचित नहीं होगा। अभी प्राप्त बोलियों का मूल्यांकन किया जा रहा है।

नम्मा मेट्रो प्रबंधन नहीं दे रहा जानकारी
नम्मा मेट्रो प्रबंधन विस्तार से जानकारी नहीं दे रहा है, मगर सूत्रों के मुताबिक चार खंडों के लिए सबसे कम राशि की जो बोली है वह अनुमानित लागत से 69.45 प्रतिशत अधिक है। मेट्रो भूमिगत रेल पथ और यहां 12 स्टेशनों के निर्माण की लागत 5047.56 करोड़ रुपए रहने का अनुमान लगाया था, जबकि न्यूनतम बोलियां 8553.45 करोड़ रुपए की हैं। इस तरह निगम के अनुमान की अपेक्षा 3505.89 करोड़ रुपए अधिक हैं।
निगम के अधिकारियों ने बोलियों की कीमत के संदर्भ में टिप्पणी इनकार करते हुए कहा कि बोली प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा न होने के कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई है। बोलीदाताओं में एल एंड टी, तुर्की की गुलरमैक, एफकोन्स इंफ्रास्ट्रक्चर और इंटालियन-थाई विकास निर्माण कंपनियां शामिल हैं। इन कंपनियों ने प्रत्येक खंड के लिए बोली लगाई है। निगम के एक अधिकारी ने बताया कि प्राप्त बोलियों को मूल्यांकन समिति द्वारा जांचा जाएगा। इसके बाद कंपनियों को स्वीकृति पत्र जारी होंगे और संबंधित पक्षों के दरमियान अनुबंध होगा।

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लम्बा हो सकता है इंतजार
दूसरे चरण का कार्य पूरा होने के लिए 2020-21 की समय सीमा तय की गई है। मगर यह स्पष्ट नहीं किया जा रहा है कि सबसे चुनौतीपूर्ण भूमिगत मार्ग का निर्माण समयबद्धता के साथ कैसे आगे बढ़ेगा। मेट्रो निगम ने पहले चरण में 8.8 किमी भूमिगत खंड को दो हिस्सों में बांटकर ठेका दिया था लेकिन तकनीकी समस्याओं और दूसरे कारणों से इस काम को पूरा होने में करीब पांच वर्ष लग गए। भूमिगत खंड ही सबसे अंत में पूरा हुआ। निगम ने पहले चरण के उत्तर-दक्षिण खंड के लिए 707 करोड़ रुपए खर्च किया था जबकि पूर्व-पश्चिम खंड के लिए 995.2 करोड़ रुपए खर्च किया था। इसमें भूमिगत खंड का हिस्सा भी शामिल था। मैजेस्टिक इंटरचेंज के लिए निगम ने 272 करोड़ रुपए खर्च किया था। मेट्रो निगम के अधिकारियों का मानना है कि दूसरे चरण में 14 किमी के भूमिगत खंड को चार हिस्सों में बांटने और सुरंग खोदने वाली 12 मशीनों का उपयोग करने से काम तीन साल मेे पूरा हो जाएगा। मेट्रो रेल के अधिकारी जहां दूसरे चरण में प्रति किमी सुरंग खोदने और स्टेशन निर्माण के लिए 360 करोड़ रुपए के खर्च का आकलन कर रहे हैं वहीं बोलीदाताओं ने 610 करोड़ रुपए प्रति किमी की मांग की है। खर्च बढऩे के साथ मेट्रो को निर्माण कार्य पूरा करने के लिए अतिरिक्त राशि भी जुटाना पड़ेगा। निगम के पास अभी विभिन्न अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से 5786 करोड़ रुपए का ऋण उपलब्ध है। भूमिगत खंड के अलावा बाकी सभी कार्यों के ठेके दिए जा चुके हैं।

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Updated on:
13 Feb 2018 08:08 pm
Published on:
13 Feb 2018 07:24 pm
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