बैंगलोर

अपनी सांसों की कद्र करें

संसार में कोई भी जीव को मृत्यु के मुख से बचाने में समर्थ नहीं है
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Updated: 9 Aug 2018, 7:31 PM IST
jainism
अपनी सांसों की कद्र करें

बेंगलूरु. हनुमंत नगर जैन स्थानक में आयोजित प्रवचन में बुधवार को साध्वी सुप्रिया ने कहा कि जो चीज संसार में घटे ही घटे वह है आयुष्य की दौलत। हमारा आयुष्य घटता ही जाता है। जो इंसान अपने सांसों की कद्र करते हुए परमार्थ कार्यों में समय व्यतीत करता है उसका जीवन सार्थक, मूल्यवान और सुखी बन जाता है। जो अपनी सांसों की कीमत नहीं समझता, उसकी कद्र नहीं करता उसका संसार में आना-जाना महत्व नहीं रखता। उन्होंने कहा कि काल का कोई भरोसा नहीं है।

जैसे सिंहनी के पंजे से हिरनी के बच्चे का छूट कर जाना बहुत ही मुश्किल है, वैसे ही संसार में कोई भी जीव को मृत्यु के मुख से बचाने में समर्थ नहीं है। प्रारंभ में साध्वी सुविधि, साध्वी सुदीप्ति ने भी विचार रखे। साध्वी सुमित्रा ने मंगलपाठ किया। संचालन सुरेश कुमार धोका ने किया।

भाव को व्यक्त करने के लिए भाषा जरूरी
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोड़वाड़ भवन में उपाध्याय प्रवर रविंद्र मुनि ने बुधवार को मंगलाचरण से प्रवचन व धर्म सभा की शुरुआत की। ऋषि मुनि ने गीतिका सुनाई। सलाहकार रमणीक मुनिजी ने ओंकार का सामूहिक उच्चारण कराया। रमणीक मुनि ने कहा कि वाणी के अभाव में इंसान समाज से कट जाता है। भावों को व्यक्त करने के लिए भाषा बहुत जरूरी है। भाषा की कीमत अवश्य समझनी चाहिए। इंसान को यह सोचने की जरूरत है कि कौन सा पाप कर्म उदय होता है जिसकी वजह से स्पष्ट नहीं बोल पाते हैं, क्योंकि बोलने की कला पुन्य वाणी से मिलती है।

उप प्रवर्तक पारसमुनि ने मांगलिक प्रदान की। रविंद्र मुनि ने संत ऋषभ मुनि के मासखमण के तहत 28वें उपवास तपस्या की अनुमोदना की। विल्सन गार्डन से इंदिरा बाई बम्ब के नेतृत्व में राजुल महिला मंडल, प्रेरणा बहुमंडल ने चौबीसी पाठ किया। संचालन चिकपेट शाखा के सहमंत्री सुरेश मूथा ने किया। बुधवार को चौमुखी जाप के लाभार्थी तेजराज संतोष बाई भिलवाडिय़ा का रविंद्र मुनि ने जैन दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया। जाप में वरिष्ठ प्रवत्र्तक रूपमुनि के स्वास्थ्य लाभ के लिए भी कामना की गई। धर्मसभा में पीरचंद ओस्तवाल, रणजीतमल कानूंगा, जयपुर, सिरसा, पानीपत, पूना, देहरादून, चेन्नई, रोपड़ से श्रद्धालु मौजूद रहे।

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