
कम स्मृति के लिए व्यक्ति खुद दोषी
बेंगलूरु. मुनि रणजीत कुमार व मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में यशवंतपुर स्थित तेरापंथ भवन में जीवन निर्माण सप्ताह के अंतर्गत बुधवार को स्मृति बढ़ाने के प्रयोग विषय पर कार्यशाला का आयोजन किया गया। मुनि रमेश कुमार ने कहा कि कल्पना की कार्यशाला में जहां मनुष्य की योजनाएं जन्म लेती हैं, कल्पना एक शक्तिशाली कोर्स है जो दिमाग से भी ज्यादा पावरफुल है। कल्पना में दिमाग से भी ज्यादा जीवित रखने की क्षमता है। हम कल्पना और धारण करके किसी चीज को ज्यादा समय तक स्मृति में रख सकते हैं।
उन्होंने कहा कि हमारी बढ़ती हुई आयु में स्मृति की कमी होने का बहुत बड़ा प्राकृतिक कारण नहीं होता है। कम स्मृति के लिए व्यक्ति स्वयं दोषी है, क्योंकि पढ़ाई छोडऩे के बाद व्यक्ति सीखने की चिंता भी छोड़ देता है। मुनि रमेश कुमार ने स्मृति विकास के लिए महाप्राण ध्वनि, दीर्घ श्वास प्रेक्षा, ज्ञान केंद्र पर पीले रंग के साथ णमो णाणस्स एवं ऐं जैसे प्रभावी मंत्रों का न्यास के साथ जप भी कराया।
स्मृति की कर्मशास्त्रीय अवधारणा को बताते हुए मुनि रणजीत कुमार ने कहा कि ज्ञानावरणीय कर्म का जितना क्षयोपशम होगा, हमारी स्मृति उतनी ही प्रखर होती जाएगी। ज्ञान की जितनी उपासना करेंगे ज्ञानावरणीय कर्म का क्षयपोशम होकर हम ज्ञान का विकास कर सकते हंै।
अमृत के समान है वाणी
बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन संघ विजयनगर की ओर से आयोजित प्रवचन में साध्वी मणिप्रभा ने कहा कि वाणी अमृत के समान है। इसलिए वाणी ऐसी होनी चाहिए जो हृदय को भेदने वाला तीर न हो। वाणी जो बोली जाए उसमें शब्द थोड़े हों और अर्थ ज्यादा। समय के अनुकूल जो वाणी बोली जाती है वह मीठी लगती है। साध्वी आस्था ने कहा कि संसार में तीन प्रकार के बल हैं। बुद्धिबल, शरीरबल और धनबल। इन तीनों में जो श्रेष्ठ है, सर्वश्रेष्ठ है वह है बुद्धिबल। शरीरबल व धनबल उससे निकृष्ट माने जाते हैं। जिस मनुष्य में बुद्धि नहीं वह पशु के समान हे। जो बुद्धिमान है वह हजारों धनिक व्यक्तियों पर शासन कर सकता है।
Published on:
09 Aug 2018 07:14 pm
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