बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ सिद्धार्थनगर में स्थित सी.आई.टी.बी. परिसर में चातुर्मास के लिए विराजित श्रुत मुनि ने कहा कि अनुयोग सूत्र में सात स्वरों का उल्लेख आता है। सा, रे, गा, मा, प, ध, नि, सा। साज स्वर हमें प्रेरणा देते हैं कि सावधान हो जाओ अर्थात आत्मा की सावधानी रखें। कहीं हमारी आत्मा काम, विचार, राग, द्वेष की भावनाओं के दलदल में फंस तो नहीं रही है। इसका हमें ध्यान रखना चाहिये। मन चंचल है, कहीं परिवर्तित नहीं हो जाए। इसका ध्यान रखना चाहिए।