सभा में ममता मखाणा ने 27, डिंपल बोहरा ने 23 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए
बेंगलूरु. राजाजीनगर में साध्वी संयमलता ने कहा कि जो अकड़ता है वह गिरता है। किसी से कुछ पाना है तो उसके सिर पर नहीं, चरणों में आना पड़ता है। उन्होंने कहा कि परमात्मा और हमारे बीच एकमात्र बाधा अहंकार है। अगर अहंकार की दीवार ढह जाए तो हमारे लिए प्रभु के द्वार खुल जाएंगे। अपने जीवन के द्वार अहंकार के लिए हमेशा बंद रखें। साध्वी कमलप्रज्ञा ने कहा कि मोह कर्म का राजा है। मोक्ष जहर है प्रेम अमृत है। प्रेम होना गलत नहीं है, मोह होना गलत है। मोह अंधकार है, प्रेम प्रकाश है। सभा में ममता मखाणा ने 27, डिंपल बोहरा ने 23 उपवास के प्रत्याख्यान ग्रहण किए। दोपहर में महिला शिविर हुआ।
सच्चा श्रावक बनना है तो गुणों को अपनाएं
बेंगलूरु. चामराजपेट में साध्वी वीणा ने कहा कि यदि सच्चा श्रावक बनना है तो श्रावक के गुणों को अपनाना होगा। श्रावक में दयालुता होनी चाहिए। उसमें दुखी जनों को देखकर प्रेम उमड़ आए। उनको सुखी बनाने के लिए मन तैयार हो जाए। उन्होंने कहा कि सज्जन पुरुष कहते हैं, दया धर्म का मूल है। जहां दया होती है वहां सभी गुण और सुख प्राप्त हो जाते हैं। साध्वी अर्पिता ने 18 पापों में से रति अरति की चर्चा की। संयम में अरुचि और असंयम में रुचि रखना रति अरति है। आज सब की रति संसार की ओर है, किसी की टीवी पर है, किसी की फोन संसार की वस्तुएं से मन को हटाकर जिससे हमें मोक्ष प्राप्त हो उसमें रति रखनी है।
बिना मोक्ष परमात्मा की शरण नहीं
बेंगलूरु. जिन कुशल सूरी जैन आराधना भवन, बसवनगुड़ी में साध्वी प्रियरंजना ने कहा कि परमात्मा अपने प्रभाव से प्राणी मात्र का उद्धार कर सकते हैं। भव पार उतार सकते हैं, लेकिन यह अद्र्ध सत्य है। उन्होंने कहा कि सत्य ये है कि परमात्मा हमें तब ही तार सकते हैं जब हम उनके बताए पथ के पथिक बनने को तैयार हों। नदी के दूसरे किनारे पर पहुंचने के लिए नाव पर सवारी तो हमें ही करनी पड़ेगी। मानो कि नाव में तिराने की शक्ति है, परंतु नाव में तो हमें ही बैठना पड़ेगा। बिना नाव में बैठे नदी पार नहीं कर सकते। उसी प्रकार परमात्मा की शरण लिए बिना मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकते।