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धन के लिए धर्म नहीं छोड़ें

अत्याचार, बेइमानी, धोखाधड़ी, विश्वासघात रूपी अन्याय से दूरी रखते हुए न्याय और नीति से प्रीति होनी चाहिए
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बैंगलोर

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Ram Naresh Gautam

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Updated: 29 Aug 2018, 5:13 PM IST

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धन के लिए धर्म नहीं छोड़ें

बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के जय परिसर महावीर धर्मशाला में जयधुरन्धर मुनि ने कहा कि नैतिकता द्वारा इंसान अपनी एक अमिट छाप बना डालता है। उन्होंने श्रावक के पंद्रहवें गुण का वर्णन करते हुए कहा कि न्यायप्रियता श्रावक का एक विशिष्ट गुण है। जो नैतिक होता है, वह प्रामाणिक भी होता है और वही धार्मिक बनता है।

न्याय और नीति धर्म का अभिन्न अंग है। अत्याचार, बेइमानी, धोखाधड़ी, विश्वासघात रूपी अन्याय से दूरी रखते हुए न्याय और नीति से प्रीति होनी चाहिए। न्यायपूर्ण एवं सही तरीके से प्राप्त धन सम्पति है और अन्याय एवं गलत तरीके से कमाया हुआ पैसा विपत्ति को आमंत्रण देता है। धन के लिए व्यक्ति को धर्म नहीं छोडऩा चाहिए।

इस मौके पर सामूहिक संगीत एकासना में सौ से अधिक तपस्वियों ने हिस्सा लिया। चंद मिनटों में ही एकासन पूर्ण करने वालों को पुरस्कार प्रदान किए गए। महावीर बोहरा व जम्बुबाई छाजेड़ ने संयुक्त प्रथम स्थान तथा गुणवंती नाहटा ने द्वितीय व संतोष कांटेड़ ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। निकेश बाफणा ने सात उपवास के प्रत्याख्यान अंगीकार किए।


संसार का दूसरा नाम दुख का धाम
बेंगलूरु. शंखेश्वर पाŸवनाथ जैन संघ, राजाजीनगर में आचार्य मुक्ति सागर सूरी ने कहा कि संसार नाम दुख का धाम है। यह संसार दुख से भरपूर है। सिर के बाल शायद आप गिन सकोगे परंतु आपकी चिंताए अनगिनत है। उन्होंने कहा कि एक चिंता पूरी नहीं होती और दूसरी उससे भी भयंकर शुरू हो जाती है। चिंता तो चिता से भी बढ़कर है। चिता सिर्फ मुर्दे को जलाती है, मगर चिंता तो जिंदा इंसान को भी जलाकर राख कर देती है। आचार्य ने कहा कि समुद्र चारों तरफ से खारा ही है, ठीक वैसे ही संसार में हर समय हर जगह हर किसी को बस दुख मिल रहा है। ट्रस्टी जयंतीभाई ने बताया कि नौ दिवसीय अखंड जाप एवं मांत्रिक विधान के साथ नवकार महामंत्र की आराधना चल रही है।