
व्यंग्यकार शरद जोशी पर हुई चर्चा
सुरेंदर सूरी ने 'बचे खुचे हुए लम्हात पे गज़़ल है हुई' पंक्तियां पढ़कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की
बेंगलूरु. अखिल भारतीय साहित्य साधक मंच का 137वां सारस्वत कार्यक्रम जेपी नगर स्थित लायंस क्लब के सभागार में सीएस पद्मा सुधा, मुख्य प्रबंधक राजभाषा प्रभाग, विजया बैंक के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।विशेष अतिथि के रूप में कन्नड़ कवि चंद्रशेखर हड़पाद, लखनऊ के गीतकार डा. श्याम गुप्त, नागौर के साहित्यकार माणक तुलसीराम गौड़ एवं शायर शकीब फय़ाज़ मंच पर विराजमान थे।
कार्यक्रम के प्रथम सत्र में व्यंग्यकार शरद जोशी के कृतित्व पर विस्तार से चर्चा हुई जिसमें उर्मिला श्रीवास्तव और मंजू वेंकिट ने भाग लिया।
दूसरे सत्र में आयोजित काव्य गोष्ठी और मुशायरे में हिंदी उर्दू और कन्नड़ की त्रिवेणी में श्रोता लगभग 4 घंटे तक डुबकियां लगाते रहे।
शकीब फय़ाज़ ने 'दिलों को तोडऩे वाला हुनर नहीं आयाÓ, सुरेंदर सूरी ने 'बचे खुचे हुए लम्हात पे गज़़ल है हुईÓ, मंजू गुप्ता ने 'खुद को दर्पण बना लिया हमनेÓ, गुफरान अमजद ने 'छू के आया है वो बुलन्दी को, फिर उदासी कहां से आई है, Ó जैसे एक से बढ़कर एक दिल को छू लेने वाली पंक्तियां पढ़कर कार्यक्रम को ऊंचाई प्रदान की।
कवि गोष्ठी में मंजू वेंकट, डा श्याम गुप्त, रजनी शाह,उर्मिला श्रीवास्तव, शिवेश स्वरुप, जयंती खेतान, विजयराज मरोटी, शशि मंगल, माणिक तुलसीराम, सुधा दीक्षित, मृदुला सिंह, जे पी सैनी, अशोक उपाध्याय, अबरार अहमद, रोशन लाल गुप्ता, डा सुनील पँवार, प्रतीक पलोड, अरसल बनारसी, संजय गुप्त, देशपति देश, श्वेता शर्मा, नरसिम्हन, मनीषा पलोड, यूनुस परवेज, अक्रमुल्ला बेग, अरुणा, वेंकटराम भारती, वरदराजन, रेणुका, विश्वनाथ, लक्ष्मीनाथ, रमेश, चंद्रशेखर हड़पाद, विश्वनाथ गौड़ और ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने अपनी उत्कृष्ट रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया। मुख्य अतिथि पद्मा सुधा ने भाषायी एकता की दिशा में मंच द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की। संचालन मंच अध्यक्ष ज्ञानचंद मर्मज्ञ ने किया।