
बेंगलूरु. राजाजीनगर स्थानक में साध्वी संयमलता ने कहा कि नारी नर से आगे है, जो काम पुरुष नहीं कर पाते वह नारी कर दिखाती है।
उन्होंने कहा कि सेवा, खेल, पढ़ाई, अंतरीक्ष एवं मीडिया के क्षेत्र में नारी ने समाज, देश व राष्ट्र के मान को बढ़ाया है। आज की नारी अपने दायित्व को ही नहीं, अपनी शक्ति और स्वाभिमान को भी भूल गई। आज नारी ही नारी का शोषण कर रही ैहै।
बेटी को वरदान के स्थान पर अभिशाप माना जाने लगा है। आजकल की नारी व्यसन और फैशन में डूबी है। साध्वी अमितप्रज्ञा ने सोमवार की चर्चा करते हुए कहा कि सोम यानी चंद्रमा। चंद्रमा हमें शीतलता देता है। चंद्रमा निरंतर प्रगति का प्रतीक है। हमें दूज के चांद की तरह बढ़ते रहना चाहिए। हनुमंतनगर की महिला मंडल के 50 सदस्यों, चिकपेट बहु मंडल ने दर्शन प्रवचन का लाभ लिया। दोपहर में महिला शिविर हुआ।
आचार्य विमल सागर जयंती महोत्सव शुरू
श्रवणबेलगोला. श्रवणबेलगोला में आचार्य विमल सागर की 102वीं जयंती पर दो दिवसीय महोत्सव का आरंभ शोभायात्रा के साथ हुआ।
आचार्य वर्धमान सागर सहित अनेक आचार्य संघ, उपाध्याय उर्जयन्त सागर, प्रज्ञासागर मुनि, अमरकीर्ति अमोधकीर्ति सहित अनेक मुनिसंघ ने शोभायात्रा की रौनक बढाई। चारुकीर्ति भट्टारक स्वामी के नेतृत्व में व उपाध्याय उर्जयन्त सागर के निर्देशन में 125 से अधिक साधु संतों के सान्निध्य में चौसठ ऋद्धि महामंडल विधान का आयोजन हुआ, जिसमें आचार्य विमल सागर की 102वीं जयंती के अवसर पर गुरु भक्तों द्वारा उनकी पूजा की गई। संपूर्ण विधान मुनि सुयशगुप्त के संचालन में हुआ। देश भर से आए भक्तों ने धर्मलाभ लिया।
इस मौके पर प्रज्ञासागर मुनि ने कहा कि वात्सल्य रत्नाकर उपाधि से प्रसिद्ध आचार्य विमल सागर का परिचय आज देने की आवश्यकता नहीं है। आज आचार्य अपने आप में एक तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हो चुके हैं। मुनि ने कहा कि आज जो भी सम्मेद शिखर जाएगा वह आचार्य विमल सागर को वहां जरुर जाएगा। वहां के कण कण में आचार्य की अनुभूति है।
मुनि ने खुद को सौभाग्याशाली बताते हुए कहा कि वे आचार्य की परम्परा के साधु गुण में आते हैं। वे गर्व कह सकते हैं कि आचार्य उनके दादा गुरु हैं। उनके जैसे वात्सल्य को उन्होंने अपने गुरु आचार्य पुष्पदंत सागर में हमेशा पाई है। महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को श्रवणबेलगोला स्थित भंडार बसदी में अतिप्राचीन चौबीसी का पंचामृत महामस्तकाभिषेक किया जाएगा। चामुंडराय मंडप में दोपहर में विनयांजलि सभा में आचार्य संघ, साधुगण अपनी भावनाएं व्यक्त करेंगे।