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न्याय नीति से हो धन का उपार्जन

चेन्नई के कोडीतोप बाजार से जैन नवयुवक मंडल ने प्रवचन लाभ लिया
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न्याय नीति से हो धन का उपार्जन

बेंगलूरु. वीवीपुरम स्थित महावीर धर्मशाला में जयधुरंधर मुनि ने व्रत शिविर में कहा कि गृहस्थी को अपने जीवन निर्वाह के लिए धन की आवश्यकता होती है। धन प्राप्ति की लालसा में इंसान को अन्याय, अत्याचार, छल और धोखाधड़ी का सहारा नहीं लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि अर्थ के लिए सब व्यर्थ नहीं जाना चाहिए। धन का उपार्जन न्याय और नीति से होना चाहिए। चेन्नई के कोडीतोप बाजार से जैन नवयुवक मंडल ने प्रवचन लाभ लिया। राजाजी नगर त्रिशला महिला मंडल ने मुनिवृंदों का दर्शनलाभ लिया। सभा में अनेक उपनगरों से श्रद्धालु मौजूद रहे। करीब 200 श्रावकों ने तीसरे व्रत के प्रत्याख्यान ग्रहण किए।


दया है तो सम्यगदर्शन : साध्वी प्रियंजनाश्री
बेंगलूरु. बसवनगुड़ी में साध्वी प्रियंजनाश्री ने कहा कि सर्व गुणों में मुख्य और प्रधान गुण दया है।
उन्होंने कहा कि चाहे लज्जा गुण हो, सौमा प्रकृति हो या पाप भीरु हो इन सभी में दया नहीं हो तो अन्य गुणों की कुछ भी कीमत नहीं है। साधना का मार्ग तलवार की धार से भी भयंकर है। उन्होंने कहा कि शरीर रोगग्रस्त बन सकता है, सहवर्ति आक्रोश करे वचनों से अपने पर आक्रमण भी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि दया है तो सम्यग दर्शन है अन्यथा सद्गृहस्थ भी नहीं है। इसलिए अपने हृदय को सरल रखो।


परिधान हमारे धर्म के अनुकूल हो
बेंगलूरु. तेरापंथ महिला मंडल यशवंतपुर के तत्वावधान में मुनि राणजीत कुमार व मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में कन्या मंडल के लिए 'जैन संस्कृतिÓ पर कार्यशाला आयोजित की गई। महिला मंडल की मंत्री मीनाक्षी दक ने विषय प्रस्तुति दी। संयोजिका स्नेहा गन्ना ने स्वागत किया। डॉ रुचि मेहता ने प्रशिक्षण दिया। मुनि रणजीत कुमार ने कहा कि विकृति के दौर में जैन धर्म और जैन संस्कृति की सुरक्षा के लिए संस्कार निर्माण की अपेक्षा है।

इसके लिए परिधान हमारे धर्म के अनुकूल हो। मुनि रमेश कुमार ने कहा कि कन्याओं को संस्कारी बनाकर संस्कृति की सुरक्षा की जा सकती है। द्वितीय चरण में कुकिंग कम्पिटिशन में 10 कन्या प्रतियोगियों ने भाग लिया, जिनमें से प्रथम सोनाली, द्वितीय स्नेहा, तृतीय एश्वर्या रही। निर्णायक रंजीता गोलच्छा, राजल बाबेल, रुचि मेहता रहे। आभार दिव्या दक ने व्यक्त किया। संचालन अदिति गन्ना ने किया।

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