बैंगलोर

महलों के शहर में छाया रहा उत्सव का उत्साह

वरमहालक्ष्मी को वोब्बतु, पायस, वड़ा, पोंगल समेत विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग चढ़ा

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महलों के शहर में छाया रहा उत्सव का उत्साह

मैसूरु. शहर में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ वरमहालक्ष्मी पूजन किया गया। घर-घर में गृहिणियों ने मंगल कलश की स्थापना के साथ फल-फूलों की सजावट के बीच वरमहालक्ष्मी की प्रतिमा का पूजन कर परिवार के मंगल की कामना की। वरमहालक्ष्मी को वोब्बतु, पायस, वड़ा, पोंगल समेत विभिन्न प्रकार के व्यंजनों का भोग चढ़ाने के बाद पड़ोसियों को व्यंजनों का प्रसाद वितरित किया गया।

चामुंडी और कोल्लूर के मुकांबिका मंदिर समेत चामराजनगर, हासन, दक्षिण कन्नड़, उत्तर कन्नड़ जिलों के लक्ष्मी मंदिरों में विशेष पूजा अनुष्ठान हुए। मनोहर सीरवी ने बताया कि लोगों ने उत्साह से खरीदारी की। दुकानों पर मिठाई खरीदने के लिए लोगों का तांता लगा रहा। इसी तरह श्रीरंगपट्टण तहसील के अरकेरे गांव के अगड्डी मोहल्ला में स्थित लक्ष्मी देवस्थान में वरमहालक्ष्मी पर्व पर पूजा-अर्चना व दर्शन के लिए भक्तों की भीड़ रही। पुजारियों ने देवी प्रतिमा को फूलों से अलंकार कर सजाया। मंदिर को विद्युत लाइट व फूलमाला से सजाया गया।

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अष्टलक्ष्मी के रूप में आराधना
प्रतिवर्ष श्रावण माह के पहले शुक्रवार अथवा पूर्णिमा से पूर्व के (कन्नड़ पंचाग अनुसार) शुक्रवार को वरमहालक्ष्मी पूजन किया जाता है। लक्ष्मी को संपत्ति की आदि देवता माना जाता है। श्रद्धालुओं की श्रद्धा है कि लक्ष्मी देवी की कृपा-कटाक्ष से घर में धन, धान्य संपत्ति होती है। इस अवसर पर लक्ष्मी की धनलक्ष्मी, धान्यलक्ष्मी, सौभाग्य लक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, कीर्ति लक्ष्मी, मोक्ष लक्ष्मी इन आठ रूपों में आराधना की गई। संस्कृत तथा वैदिक साहित्य में लक्ष्मी को सौंदर्य, संपत्ति, विजय, सफलता की देवी के रूप में तथा समस्त लौकिक सुख प्रदाता देवी के रूप में वर्णित किया गया है।


माता पद्मावती से मांगी मन्नत
बेंगलूरु. अतिशय क्षेत्र हुमचा पद्मावती में शुक्रवार को भट्टारक देवेंद्रकीर्ति के सान्निध्य में भगवान पारसनाथ का पंचामृत अभिषेक के साथ मां पद्मावती का शास्त्रोक्त विधि से अभिषेक किया गया। इस मौके पर माता की गोद भराई की रस्म पूरी की गई। भक्तों ने माता पद्मावती से मन्नत भी मांगी।

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Published on:
25 Aug 2018 06:47 pm
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