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नम: कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नम:

लोक पर्व: श्रद्धा, भक्ति के साथ घर-घर में हुआ वरमहालक्ष्मी का पूजन

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varmahalaxmi

नम: कमलवासिन्यै नारायण्यै नमो नम:

बेंगलूरु. धन, धान्य, ऐश्वर्य प्रदाता लोक पर्व के अवसर पर सुहागिनों ने शुक्रवार को श्रद्धा एवं भक्ति के साथ घर-घर में वरमहालक्ष्मी का पूजन किया। इस अवसर पर घरों के सामने रंग-बिरंगी रंगोलियां तथा घर के मुख्य रवाजे पर आम के पत्ते के तोरण लगाए गए।

विशेष सजावट से तैयार मंडप में मंगल कलश स्थापित कर वरमहालक्ष्मी की प्रतिमा को आभूषणों का अलंकार किया गया। पूजन के दौरान गंगा कलश को विशेष रूप से सोने के आभूषणों से सजाया गया। गृहिणियों के उपवास व्रत के साथ किए गए इस पूजन के माध्यम से परिवार के आनंद मंगल, सुख, स्वास्थ्य तथा संपन्नता की कामना की गई।

इस अवसर पर वरमहालक्ष्मी देवी को गेहूं की खीर समेत गेहूं के आटे से बने विभिन्न मिष्ठान्नों तथा व्यंजनों का भोग चढ़ाया गया। पूजन के पश्चात यह नैवेद्य पांच सुहागिनों को अर्पित कर उनको हरे कंगन, कुमकुम, हल्दी जैसे सौभाग्य के चिह्नों के साथ दक्षिणा अर्पित की गई। वरमहालक्ष्मी पूजन में सजावट अहम होती है। इस सजावट के लिए गृहिणियों ने घंटों तक मेहनत की। वरमहालक्ष्मी केवल एक पूजन नहीं बल्कि एक व्रत है। इसे सभी धार्मिक व्रतों की राणी कहा जाता है।


समाज को संदेश देता है यह पर्व
सनातन संस्कृति में मातृदेवता पूजन की परंपरा सदियों से चलती आ रही है। इस परंपरा के अनुसार सुख, समृद्धि तथा संपन्नता की प्रतीक लक्ष्मीदेवी का पूजन किया जाता है। घर-घर में धन, धान्य, सुख, स्वास्थ्य का स्थायी वास होने की मंगल कामना को लेकर यह पूजन किया जाता है।
धार्मिक चिंतकों के मुताबिक पूजा-पूजन केवल औपचारिक क्रिया नहीं है। इस क्रिया के पीछे अगर वास्तविक श्रद्धा व भक्ति नहीं होगी तो ऐसे पूजन केवल एक दिखावा बनकर रह जाएंगे। ऐसे अनुष्ठानों का वाणिज्यिकरण इन अनुष्ठानों के वास्तविक आशय को छिपा रहा है। महाराजा अग्रसेन हॉस्पिटल के महालक्ष्मी अग्रसेन मंदिर में वरमहालक्ष्मी दिवस पर अध्यक्ष सतीश जैन एवं कोषाध्यक्ष आरके पोद्दार ने स्टाफ एवं डॉक्टरों के साथ महालक्ष्मी की पूजा-अर्चना की।