
बेंगलूरु. सौर ऊर्जा को बढावा देने के मकसद से राज्य सरकार एक महत्वपूर्ण बदलाव करने की तैयारी में है जिसके बाद बिल्डरों की किसी परियोजनाओं को सरकारी एजेंसियों से तभी मंजूरी मिलेगी जो वे अपनी परियोजना में सौर पैनल स्थापना के प्रावधान को दर्शाएंगे।
बेंगलूरु विद्युत आपूर्ति निगम लिमिटेड (बेसकाम) के इस प्रस्ताव को मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी, मुख्य सचिव टीएम विजय भास्कर और बेंगलूरु विकास प्राधिकरण तथा बृहद बेंगलूरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) से सैद्धांतिक मंजूरी मिल गई है। बेसकाम ने कुछ दिनों पूर्व मुख्यमंत्री के साथ हुई समीक्षा बैठक में और करीब एक पखवाड़ा पूर्व मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हुई बेंगलूरु विकास बैठक में अपने इस प्रस्ताव को रखा था। वहीं बीबीएमपी और बीडीए भी इस प्रस्ताव से संबंधित प्रपत्रों को तैयार कर रहा है और जल्द ही इसे सरकार के पास भेजा जाएगा।
सौर ऊर्जा उत्सर्जन को बढ़ाने के मकसद से दो वर्ष पूर्व राज्य में इसे लागू किया गया था लेकिन बिल्डरों ने इसे अपनाने में रुचि नहीं दिखाई। पिछले दो वर्ष में शहर में 986 रुफ-टॉप सौर पैनलों की स्थापना हुई जिनमें मात्र 771 ही आवासीय परियोजनाओं से संबंधित रहे। सौर पैनल स्थापना में रुचि नहीं दिखाने के प्रमुख कारणों में जगह की कमी और कीमत प्रमुख है।
बहुमंजिला इमारतों के डिजाइन में भी रूफ-टॉप सौर पैनल के लिए डिजाइन नहीं की जाती है। बेसकाम अब ऐसी इमारतों में अनिवार्य रूप से सौर पैनल चाहता है। आइआइएस सेंटर फॉर इंफ्रास्ट्रक्चर, सतत परिवहन एवं शहरी शहरी प्लानिंग द्वारा किए जा रहे अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि शहर में 2 गीगावॉट सौर ऊर्जा उत्सर्जन की क्षमता है। इस अध्ययन की रिपोर्ट जल्द ही बेसकॉम को सौंपी जाएगी। बेसकाम ने उपभोक्ताओं को सौर पैनल स्थापित करने और उससे उपभोक्ताओं को वित्तीय रूप से सशक्त बनाने के लिए कई सुझाव दिए हैं। इसमें सौर पैनल स्थापना में वित्तीय सहयोग उपलब्ध कराना और अतिरिक्त बिजली को बेसकाम को बेचकर पैसे कमाना शामिल है।