तीसरी भाषा केवल एक विषय नहीं, बल्कि छात्रों में बहुभाषी क्षमता, बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके बावजूद सरकार के बिना व्यापक चर्चा और अंतिम समय में लिए गए निर्णयों से छात्रों और शिक्षकों में भ्रम, निराशा और असंतोष का माहौल बन गया है।
एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकंडरी स्कूल्स इन कर्नाटक Associated Management of Primary and Secondary Schools in Karnataka ने एसएसएलसी SSLC परीक्षा में तीसरी भाषा Third Language को पास-फेल के बजाय ग्रेडिंग प्रणाली में रखने के राज्य सरकार के निर्णय की कड़ी निंदा की है। मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या को पत्र लिखकर इन फैसलों पर गंभीर चिंता जताई है।
संगठन के महासचिव डी. शशि कुमार ने कहा कि तीसरी भाषा केवल एक विषय नहीं, बल्कि छात्रों में बहुभाषी क्षमता, बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके बावजूद सरकार के बिना व्यापक चर्चा और अंतिम समय में लिए गए निर्णयों से छात्रों और शिक्षकों में भ्रम, निराशा और असंतोष का माहौल बन गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के एकतरफा फैसले शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता, स्थिरता और राष्ट्रीय समन्वय पर सवाल खड़े करते हैं। साथ ही यह भी आशंका जताई कि तीसरी भाषा को कमजोर करने से कन्नड़ भाषा की प्राथमिकता पर असर पड़ सकता है और राज्य बोर्ड के स्कूलों पर अभिभावकों का भरोसा कम हो सकता है। उन्होंने पत्र में यह भी कहा कि मध्यम वर्ग और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के अभिभावक अन्य शिक्षा बोर्डों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे पहले से संघर्ष कर रहे कन्नड़ माध्यम स्कूलों पर बंद होने का खतरा बढ़ सकता है।
सरकार से मांग की गई है कि तीसरी भाषा के महत्व पर पुनर्विचार किया जाए, सभी हितधारकों से चर्चा की जाए और दीर्घकालिक व स्थिर शिक्षा नीतियां बनाई जाएं, ताकि छात्रों के भविष्य और राज्य की शिक्षा व्यवस्था सुरक्षित रह सके।