scriptकर्नाटक बोर्ड से निराश अभिभावक | Parents disappointed with Karnataka board | Patrika News
बैंगलोर

कर्नाटक बोर्ड से निराश अभिभावक

– निजी स्कूलों की ओर कदम

बैंगलोरApr 13, 2024 / 09:26 am

Nikhil Kumar

कर्नाटक बोर्ड से निराश अभिभावक

कर्नाटक बोर्ड से निराश अभिभावक

-स्कूल स्तर पर बोर्ड परीक्षा व दाखिला नियमों से असमंजस की स्थिति

Corona Pandemic के दौरान Karnataka के सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी थी। निजी स्कूलों के लाखों बच्चों ने दाखिला लिया था, लेकिन अब कई बच्चों ने निजी स्कूलों का रुख करना शुरू कर दिया है। इसके कारण पिछले कुछ समय से, राज्य के schools में प्रवेश लेने वालों की संख्या चिंताजनक रूप से घटी है। कई Government Schools के अनुसार इस बार सबसे कम प्रवेश हुए हैं। राज्य बोर्ड से संबद्ध सरकारी स्कूल भी प्रवेश की घटती संख्या को लेकर चिंतित हैं।

शिक्षाविदों के अनुसार आगामी शैक्षणिक वर्ष के लिए, कक्षा 5, 8, 9 और 11 के लिए बोर्ड परीक्षाओं पर भ्रम और अवैध स्कूलों की आशंका जैसे मुद्दों ने अभिभावकों को निराश किया है।

पूछताछ तक नहीं

राज्य बोर्ड से संबद्ध एक स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि इस समय तक हर वर्ष प्रवेश के पूछताछ शुरू हो जाती थी, लेकिन इस वर्ष स्थिति विपरित है। अभी तक एक भी नया प्रवेश नहीं हुआ है।

भविष्य को लेकर चिंतित

पंजीकृत गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूल प्रबंधन एसोसिएशन और गैर सहायता प्राप्त मान्यता प्राप्त विद्यालयों के लिए संगठन ने कर्नाटक राज्य परीक्षा और मूल्यांकन बोर्ड (केएसईएबी) के 2023-24 के लिए कक्षा 5, 8, 9 और 11 के लिए बोर्ड परीक्षा आयोजित करने के फैसले को उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय दोनों में चुनौती दी। उच्च न्यायालय ने 22 मार्च को बोर्ड परीक्षा आयोजित करने की अनुमति दी थी, लेकिन सुप्रीम कोर्ट नेअंतत: उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी और कहा कि इन परीक्षाओं के परिणामों को स्थगित रखा जाना चाहिए। परीक्षा को लेकर अभिभावक असमंजस में हैं। बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित हैं।

यह भी एक कारण
National Education Policy (एनइपी) के नियमों के तहत किंडरगार्टन और कक्षा 1 में प्रवेश के लिए आयु आवश्यकताओं को अनिवार्य बना दिया गया है। अगर बच्चे LKG के लिए चार साल, UKG के लिए पांच साल और कक्षा एक के लिए छह साल के नहीं हैं तो प्रवेश नहीं दे सकते हैं। हालांकि, कुछ स्कूल प्रबंधनों का आरोप है कि कुछ स्कूल कम उम्र के छात्रों को भी अवैध रूप से प्रवेश दे रहे हैं। नियम-कानून की कम जानकारी और जागरूकता के अभाव में अभिभावक भी अपने बच्चों का दाखिला करवा रहे हैं। यह भी वैध स्कूलों के प्रवेश से वंचित होने का एक कारण है। ऐसे बच्चों को आगे चलकर परेशानी होगी। ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों से शिकायत करने पर भी ज्यादातर मामलों में समय रहते कार्रवाई नहीं होती है।


स्टेटस सिंबल

अभिभावकों के लिए स्कूल status symbol बन गए हैं और उनमें से अधिकांश को नियम-कानून की जानकारी नहीं है। हाल के सभी घटनाक्रमों के साथ बोर्ड शिफ्टिंग भी बहुत प्रमुख हो गया है। इसलिए, राज्य बोर्ड के लिए दाखिले में भारी कमी आई है। अप्रेल के अंत तक सरकारी व राज्य बोर्ड से संबद्ध स्कूलों में बच्चों की संख्या बढऩे की उम्मीद है।
-डी. शशिकुमार, महासचिव, एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकंडरी स्कूल्स

Hindi News/ Bangalore / कर्नाटक बोर्ड से निराश अभिभावक

loksabha entry point

ट्रेंडिंग वीडियो