
मैसूरु. जैनाचार्य विजयरत्न सूरीश्वर ने कहा कि जिस प्रकार घट पानी से पूरा भरा हुआ है तो वह छलकता नहीं है।
परन्तु आधा भरा पानी का घट अवश्य ही छलकता है। उसी प्रकार जीवात्मा को सम्पूर्ण गुणों की प्रापित होने पर वह अपने गुणों का अभिमान नहीं करता है।
वे सोमवार को सुमतिनाथ जैन संघ मैसूरु की ओर से महावीर जिनालय में आयोजित धर्मसभा को सम्बोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि ज्ञानी भगवंतों का कहना है यदि ज्ञानादि गुणों की पूर्णता है तो भी अभिमान करने जैसा नहीं है और अपूर्णता है तो भी अभिमान करने जैसा नहीं है। पूर्ण ज्ञानी को अभिमान की आवश्यकता ही नहीं है।
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भावना का क्रम स्थूल से सूक्ष्म की ओर बढ़ता है
बेंगलूरु. जयमल जैन श्रावक संघ के तत्वावधान में जय परिसर में जयधुरंधर मुनि ने कहा कि प्रत्येक भावना का क्रम स्थूल से सूक्ष्म की ओर बढ़ता है।
अन्यत्व भावना आत्मा के सबसे निकटतम संबंधी शरीर से मोह घटाती है। उस घनिष्ठता को तोडऩा और दोनों का प्रथक अस्तित्व स्वीकार कराती है। आत्मा और शरीर के बीच भेद विज्ञान होना जरूरी है।