-अस्पताल समिति से नहीं मिली मंजूरी तो उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया कभी-कभी इंसानियत खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि दिल के फैसलों से जुड़ती है। बेंगलूरु की चिकित्सक थंकम सुब्रमोनियन (58) ने यही साबित किया। जहां अधिकांश लोग अंगदान अपने परिजनों के लिए करते हैं, उन्होंने एक अजनबी को अपनी किडनी दान करने का […]
कभी-कभी इंसानियत खून के रिश्तों से नहीं, बल्कि दिल के फैसलों से जुड़ती है। बेंगलूरु की चिकित्सक थंकम सुब्रमोनियन (58) ने यही साबित किया। जहां अधिकांश लोग अंगदान अपने परिजनों के लिए करते हैं, उन्होंने एक अजनबी को अपनी किडनी दान करने का फैसला किया। इसके लिए वे सिस्टम से भी लड़ गई। उन्हें उच्च न्यायालय High Court का दरवाजा तक खटखटाना पड़ा। वर्षों की कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के बाद जीत हुई और आखिरकार उन्होंने एक अजनबी महिला को अपनी किडनी दान Kidney Donation कर मानवता की मिसाल पेश की। डॉ. सुब्रमोनियन के अनुसार उन्होंने यह फैसला किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि पूरी तरह अपनी इच्छा और मानवता की भावना से लिया। इसे सिर्फ एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि किसी अनजान की जिंदगी बचाने के साहस और करुणा के असाधारण उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. थंकम सुब्रमोनियन Dr. Thankam Subramonian मणिपाल अस्पताल में फेटल मेडिसिन कंसल्टेंट के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 2014 में अंगदान के बारे में एक व्याख्यान सुनने के बाद यह निर्णय लिया था। हालांकि, उनका यह संकल्प तुरंत पूरा नहीं हो सका। परिवार की शुरुआती चिंता, प्रशासनिक प्रक्रियाएं और कानूनी अड़चने उनके रास्ते में लगातार आती रहीं, लेकिन उन्होंने अपना इरादा नहीं बदला।
उन्होंने 2016 में जीवित दाता के रूप में किडनी दान की प्रक्रिया शुरू की। अंग तस्करी की आशंका को देखते हुए अस्पताल की समिति ने उनसे और उनके परिवार से विस्तृत पूछताछ की। इसके बावजूद समिति ने मंजूरी देने से इनकार कर दिया। यह उनके लिए निराशाजनक था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
डॉ. सुब्रमोनियन ने कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। न्यायाधीश सूरज गोविंदराज की पीठ ने 25 नवंबर 2025 को स्पष्ट किया कि यदि कोई व्यक्ति बिना किसी आर्थिक लाभ के, केवल परोपकार की भावना से, पूरी जानकारी और स्वेच्छा से अंगदान करना चाहता है, तो उसकी इच्छा का सम्मान किया जाना चाहिए। अदालत ने इसे दुर्लभ और प्रेरणादायक मामला बताया।
न्यायालय Court की अनुमति के बाद उन्होंने लगभग 50 वर्षीय एक अजनबी महिला को अपनी किडनी दान कर उन्हें जीवनदान दिया। प्रत्यारोपण सफल रहा। सर्जरी के बाद वे दोनों स्वस्थ हैं।
प्रत्यारोपण के बाद प्राप्तकर्ता के परिवार ने डॉ. सुब्रमोनियन से मिलकर आभार व्यक्त किया। यह पल दोनों परिवारों के लिए बेहद भावुक था। बिना किसी व्यक्तिगत संबंध के भी, यह मुलाकात इंसानियत के गहरे रिश्ते की मिसाल बन गई।
डॉ. सुब्रमोनियन ने उम्मीद जताई कि उनका यह कदम लोगों को अंगदान के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा, भारत में अंगदान Organ Donation in India की दर अभी भी कम है और अधिक लोगों को आगे आना चाहिए। उनका मानना है कि स्वस्थ व्यक्ति अंगदान कर किसी को जीवन का दूसरा मौका दे सकता है।